ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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त्तर-पूर्वी दिल्ली के घोंडा विधानसभा क्षेत्र के जय प्रकाश नगर इलाके में रविवार रात एक दर्दनाक हादसा हुआ। हंसराज डेयरी के पास एक घर की छत अचानक गिर गई, जिसमें मलबे में दबने से किराए पर रह रहे पति-पत्नी की मौत हो गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और पुलिस ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और दोनों को मलबे से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
रात करीब साढ़े 10 बजे हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, यह घटना रविवार रात करीब 10:30 बजे की है। जय प्रकाश नगर की गली नंबर-2 में स्थित एक एक मंजिला मकान की छत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के समय मकान में रहने वाले दंपति अंदर मौजूद थे। छत का भारी मलबा सीधे उनके ऊपर गिर गया, जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतकों की पहचान 32 वर्षीय टिंकू पुत्र सोरेन सिंह और उनकी 30 वर्षीय पत्नी उर्मिला के रूप में हुई है।
स्थानीय लोगों ने बचाव अभियान में की मदद
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए। स्थानीय लोगों और पुलिसकर्मियों ने मिलकर मलबा हटाने का काम शुरू किया। दिल्ली फायर सर्विस की टीम भी मौके पर पहुंची। फायर सर्विस के अधिकारियों के अनुसार, करीब 120 वर्ग फुट में बने एक मंजिला मकान की छत गिरी थी। मलबे से निकालने के बाद दोनों को कैट्स एम्बुलेंस की मदद से जग प्रवेश चंद्र अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मृतकों के शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजे गए
न्यू उस्मानपुर थाना पुलिस ने बताया कि घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची थी। दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए गुरु तेग बहादुर अस्पताल (GTB) भेज दिया गया है। पुलिस अब हादसे के पीछे की वजहों की जांच कर रही है।
मकान मालिक के खिलाफ FIR दर्ज
इस मामले में पुलिस ने मकान मालिक वीरेंद्र कुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 290/106(1) के तहत FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि छत गिरने की असली वजह क्या थी। पुलिस मकान की स्थिति, निर्माण गुणवत्ता और अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।
जर्जर मकानों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
दिल्ली के पुराने इलाकों में जर्जर मकानों और कमजोर निर्माण को लेकर पहले भी कई हादसे सामने आते रहे हैं। बारिश, सीलन और लंबे समय तक मरम्मत न होने के कारण कई पुराने मकानों की संरचना कमजोर हो जाती है। घोंडा की यह घटना एक बार फिर सवाल खड़े करती है कि क्या किराएदारों की सुरक्षा के लिए पुराने भवनों की नियमित जांच और मरम्मत व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और हादसे के सही कारणों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
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