ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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यूक्रेन-रूस युद्ध, इजरायल-हमास संघर्ष और ईरान के साथ बढ़े तनाव के बाद अमेरिका अपने रक्षा भंडार को तेजी से मजबूत करने में जुट गया है। लंबे समय तक विभिन्न मोर्चों पर सहयोगी देशों को हथियार और मिसाइलें उपलब्ध कराने के कारण अमेरिकी मिसाइल स्टॉक पर दबाव बढ़ा है। इसी चुनौती से निपटने के लिए ट्रंप प्रशासन ने रक्षा इतिहास के सबसे बड़े मिसाइल उत्पादन समझौतों में से एक को मंजूरी दी है। अमेरिका ने रक्षा कंपनी लॉकहीड मार्टिन को 58.6 अरब डॉलर तक का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट दिया है। इस समझौते के तहत वर्ष 2032 तक बड़ी संख्या में पैट्रियट PAC-3 MSE इंटरसेप्टर मिसाइलों का उत्पादन किया जाएगा।
क्यों पड़ी इतनी बड़ी डील की जरूरत?
अमेरिका ने पिछले कुछ वर्षों में यूक्रेन को रूस के खिलाफ रक्षा सहायता दी है। इसके अलावा इजरायल को भी लगातार सैन्य सहयोग मिलता रहा है। ईरान से जुड़े तनाव के दौरान भी बड़ी संख्या में मिसाइल इंटरसेप्टर का इस्तेमाल किया गया। इन परिस्थितियों के कारण अमेरिकी रक्षा भंडार में मौजूद कई महत्वपूर्ण मिसाइलों की संख्या कम हो गई। अब पेंटागन भविष्य की संभावित चुनौतियों को देखते हुए अपने हथियारों का स्टॉक तेजी से बढ़ाना चाहता है।
सात साल का होगा नया समझौता
अमेरिकी सेना के अनुसार, पहले अप्रैल में दिया गया 4.7 अरब डॉलर का एक वर्षीय अनुबंध अब सात साल के फ्रेमवर्क एग्रीमेंट में बदल दिया गया है। यह समझौता वित्तीय वर्ष 2026 से 2032 तक लागू रहेगा। इसका उद्देश्य पैट्रियट एडवांस्ड कैपेबिलिटी-3 मिसाइल सेगमेंट एन्हांसमेंट (PAC-3 MSE) इंटरसेप्टर का उत्पादन कई गुना बढ़ाना है, ताकि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी सेना और उसके सहयोगी देशों को पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
क्या है PAC-3 MSE मिसाइल?
PAC-3 MSE इंटरसेप्टर पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसे 'हिट-टू-किल' तकनीक के आधार पर विकसित किया गया है। यह मिसाइल दुश्मन की आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और लड़ाकू विमानों को हवा में ही निशाना बनाकर नष्ट करने की क्षमता रखती है। मौजूदा वैश्विक सुरक्षा माहौल में पैट्रियट सिस्टम दुनिया के सबसे अधिक मांग वाले एयर डिफेंस प्लेटफॉर्म में शामिल है।
चीन को लेकर भी बढ़ी चिंता
अमेरिका केवल वर्तमान संघर्षों को ही नहीं देख रहा, बल्कि भविष्य की संभावित चुनौतियों की भी तैयारी कर रहा है। अमेरिकी रक्षा रणनीति में चीन के साथ संभावित सैन्य टकराव की आशंका को भी ध्यान में रखा जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन रक्षा कंपनियों पर सैन्य उत्पादन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का दबाव बना रहा है ताकि किसी बड़े संघर्ष की स्थिति में हथियारों की कमी न हो।
रक्षा उद्योग में होगा बड़ा निवेश
लॉकहीड मार्टिन का कहना है कि लंबे समय तक मिलने वाली फंडिंग से वह 2030 के दशक के अंत तक PAC-3 MSE मिसाइलों का उत्पादन तीन गुना करने की योजना पर तेजी से काम करेगा। इसके लिए कंपनी कर्मचारियों की संख्या 1,200 से बढ़ाकर लगभग 1,850 करेगी। साथ ही 2030 तक अमेरिका में 20 से अधिक उत्पादन और निर्माण सुविधाओं के आधुनिकीकरण पर 8 से 9 अरब डॉलर के निवेश की योजना है। अलबामा और अर्कांसस में नए गोला-बारूद उत्पादन केंद्र भी विकसित किए जाएंगे।
कांग्रेस की मंजूरी रहेगी अहम
हालांकि रक्षा उद्योग ने इस दीर्घकालिक समझौते का स्वागत किया है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि उत्पादन क्षमता बढ़ाने और सप्लाई चेन का विस्तार करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस से आवश्यक बजट मंजूरी भी जरूरी होगी। यदि फंडिंग समय पर स्वीकृत होती है, तो अमेरिका आने वाले वर्षों में अपनी मिसाइल उत्पादन क्षमता को काफी हद तक बढ़ा सकता है और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए खुद को अधिक तैयार कर सकेगा।
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