ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ईरान और ओमान ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही को फिर से सुरक्षित बनाने के लिए एक अस्थायी समुद्री रास्ता तैयार करने पर बातचीत शुरू की है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को लेकर सुरक्षा चिंता लगातार बनी हुई है। मंगलवार को दोनों देशों ने जॉइंट टेंपररी नेविगेशनल कॉरिडोर बनाने पर चर्चा की। इस प्रस्तावित रास्ते से सी माइंस हटाने को लेकर भी दोनों देशों के बीच सहमति बनी है। माना जा रहा है कि अगर यह कॉरिडोर तैयार होता है तो समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को कुछ राहत मिल सकती है।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां से बड़ी संख्या में तेल और गैस ले जाने वाले जहाज गुजरते हैं। ऐसे में इस रास्ते पर किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर डाल सकता है। ईरान और ओमान के बीच पिछले कई हफ्तों से इस जलमार्ग को लेकर बातचीत चल रही थी। अब दोनों देशों ने अस्थायी नेविगेशनल कॉरिडोर को लेकर चर्चा आगे बढ़ाई है। हालांकि, इस पहल के बावजूद होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
तेल टैंकर पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला
मंगलवार को ओमान के अश शिशाह इलाके से करीब 9 नॉटिकल मील यानी लगभग 17 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में एक तेल टैंकर पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ। हमले के बाद टैंकर आगे नहीं बढ़ सका। इस घटना की जानकारी ब्रिटेन के यूके मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने दी। घटना ने एक बार फिर होर्मुज और आसपास के समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले दावा कर चुके हैं कि होर्मुज स्ट्रेट से सभी माइंस हटा दी गई हैं। लेकिन टैंकर पर हुए ताजा हमले के बाद समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर सवाल बने हुए हैं।
अमेरिका-ईरान के बीच तनाव पूरी तरह खत्म नहीं
अमेरिका और ईरान के बीच सीधी सैन्य कार्रवाई में कमी जरूर आई है, लेकिन दोनों देशों के बीच शांति समझौते को लेकर बातचीत आगे नहीं बढ़ पा रही है। यही वजह है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए जोखिम अभी भी बना हुआ है। दूसरी तरफ अमेरिका ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका ने उन देशों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है, जो ईरान के साथ कारोबार जारी रखेंगे। हालांकि तत्काल नए प्रतिबंध लगाने की बात से अमेरिका ने फिलहाल इनकार किया है।
अमेरिका ने दूतावासों से कर्मचारियों को वापस बुलाना शुरू किया
तनाव के बीच अमेरिका ने मध्य पूर्व के कुछ दूतावासों में कर्मचारियों को वापस भेजना शुरू कर दिया है। ये कर्मचारी ईरान के साथ तनाव बढ़ने के दौरान वापस बुलाए गए थे। इस कदम को इस संकेत के तौर पर देखा जा रहा है कि अमेरिका को फिलहाल बड़े स्तर पर संघर्ष बढ़ने का खतरा पहले की तुलना में कम नजर आ रहा है। हालांकि कुछ दूतावास अभी पूरी क्षमता के साथ काम नहीं करेंगे।
युद्ध का असर ट्रंप की लोकप्रियता पर भी
ईरान संघर्ष का असर अमेरिकी राजनीति पर भी दिखाई दे रहा है। रॉयटर्स/इप्सोस के सर्वे के मुताबिक, युद्ध को लेकर अमेरिकी जनता का समर्थन संघर्ष शुरू होने के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता भी रिकॉर्ड निचले स्तर पर बताई जा रही है। नवंबर में अमेरिका में कांग्रेस के चुनाव होने हैं, ऐसे में विदेश नीति और युद्ध का मुद्दा घरेलू राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
हजारों लोगों की मौत, परमाणु कार्यक्रम पर सवाल
इस संघर्ष में हजारों लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या ईरान और लेबनान के लोगों की बताई गई है। अमेरिका और इजराइल ने ईरान की पारंपरिक सैन्य क्षमता को काफी नुकसान पहुंचाया है। हालांकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम की मौजूदा स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। अमेरिका और इजराइल ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना चाहते हैं। ऐसे माहौल में ईरान और ओमान का अस्थायी समुद्री कॉरिडोर बनाने का प्रयास क्षेत्रीय तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। लेकिन इसकी सफलता काफी हद तक समुद्री सुरक्षा और अमेरिका-ईरान संबंधों में आगे होने वाले घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।
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