ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी PoK में लंबे समय से चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने अब बातचीत का रास्ता अपनाने की बात कही है। लगातार तनाव, हिंसक झड़पों और विवादित चुनाव प्रक्रिया के बीच शाहबाज शरीफ ने प्रदर्शनकारियों और संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी यानी JAAC से बातचीत की पेशकश की है। शाहबाज शरीफ ने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान टकराव से नहीं, बल्कि बातचीत की मेज पर बैठकर किया जाना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब PoK में सरकार के खिलाफ असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
आखिर क्यों हो रहा है विरोध?
PoK में पिछले कई हफ्तों से महंगाई, आर्थिक परेशानियों और चुनाव प्रक्रिया को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। JAAC ने चुनाव से जुड़े कुछ प्रावधानों और खास तौर पर 12 आरक्षित सीटों को लेकर आपत्ति जताई है। इस संगठन का आरोप है कि इन सीटों के जरिए क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति को प्रभावित किया जा सकता है। विरोध के दौरान कई जगहों पर हालात तनावपूर्ण हुए। कुछ इलाकों में हिंसा और सुरक्षा बलों के साथ झड़पों की खबरें भी सामने आईं। इसके बाद सरकार पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्ती करने के आरोप लगे।
चुनाव के बीच PML-N को बड़ी बढ़त
PoK में विधानसभा चुनाव भी इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच हो रहे हैं। पाकिस्तान की सत्ताधारी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज यानी PML-N ने शुरुआती चरणों में मजबूत प्रदर्शन किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, PML-N पहले ही 34 में से 24 सीटें जीत चुकी थी और बाकी सीटों पर भी उसकी स्थिति मजबूत बताई गई। अंतिम चरण की वोटिंग भी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कराई गई, हालांकि कुछ क्षेत्रों में सुरक्षा कारणों से मतदान प्रभावित हुआ। इस बढ़त के बाद PML-N के PoK में फिर से सरकार बनाने की संभावना मजबूत हो गई है।
सरकार का बदला हुआ रुख क्यों अहम?
दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ सरकार चुनावी बढ़त हासिल कर रही है, वहीं दूसरी तरफ विरोध प्रदर्शनों का दबाव भी बना हुआ है। ऐसे में शाहबाज शरीफ का बातचीत की पेशकश करना राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शाहबाज के करीबी सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने भी प्रदर्शनकारियों के प्रति नरम रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि JAAC से जुड़े करीब 99 प्रतिशत लोग देशभक्त हैं और PML-N के प्रतिनिधि संगठन के सदस्यों से बातचीत करेंगे। यानी सरकार अब सिर्फ सख्ती के जरिए स्थिति संभालने के बजाय बातचीत से रास्ता निकालने की कोशिश करती दिखाई दे रही है।
आगे क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या JAAC सरकार की बातचीत की पेशकश को स्वीकार करेगा और क्या दोनों पक्ष किसी समझौते तक पहुंच पाएंगे। PoK में चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लेकिन विरोध और राजनीतिक असंतोष पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में शाहबाज शरीफ सरकार के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ चुनाव के बाद नई सरकार को स्थिर करना और दूसरी तरफ प्रदर्शनकारियों की नाराजगी को शांत करना। फिलहाल बातचीत की पेशकश से इतना जरूर साफ है कि PoK का मुद्दा पाकिस्तान सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन चुका है
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