ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों को ऐसी जानकारी मिली थी कि ईरान ट्रंप के विमान एयर फोर्स वन को निशाना बनाने की तैयारी कर सकता है। इस इनपुट के बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने ट्रंप की यात्रा को लेकर एक बेहद गोपनीय प्लान तैयार किया। राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए ऐसा कदम उठाया गया, जिससे संभावित हमलावर को यह पता ही न चल सके कि ट्रंप वास्तव में किस विमान में मौजूद हैं।
एयर फोर्स वन में नहीं बैठे ट्रंप
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप को सामान्य तरीके से एयर फोर्स वन तक नहीं ले जाया गया। सुरक्षा अधिकारियों ने उन्हें एयरपोर्ट के एक कैटरिंग ट्रक के जरिए दूसरे सैन्य विमान तक पहुंचाया। इसके बाद ट्रंप को C-32A सैन्य विमान में बैठाया गया। इस पूरी प्रक्रिया को बेहद गोपनीय रखा गया। मकसद था कि अगर कोई संभावित हमलावर एयरपोर्ट या विमान की गतिविधियों पर नजर रख रहा हो, तो उसे ट्रंप की वास्तविक लोकेशन का पता न चल सके।
एयर फोर्स वन बना ‘डिकॉय’
इस सुरक्षा योजना का सबसे दिलचस्प हिस्सा यह था कि एयर फोर्स वन को खाली नहीं रखा गया। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, कई वरिष्ठ अधिकारी और पत्रकार एयर फोर्स वन में ही मौजूद रहे। इससे बाहर से देखने वाले किसी व्यक्ति को यही लगता कि राष्ट्रपति ट्रंप भी उसी विमान में सवार हैं। यानी सुरक्षा अधिकारियों ने मुख्य विमान को एक तरह के डिकॉय यानी भ्रम पैदा करने वाले विमान की तरह इस्तेमाल किया। ट्रंप इस दौरान दूसरे विमान से यात्रा कर रहे थे।
आखिर ईरान से कितना बड़ा खतरा था?
यहां सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या ईरान वास्तव में ट्रंप या एयर फोर्स वन पर हमला करने वाला था? फिलहाल इसका कोई सार्वजनिक रूप से पुष्ट जवाब सामने नहीं आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों को मिली खुफिया जानकारी के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया गया था। लेकिन इस दौरान ट्रंप के विमान पर कोई मिसाइल हमला नहीं हुआ। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि संभावित खतरा कितना वास्तविक और कितना तत्काल था। हालांकि, अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों ने इनपुट को इतना गंभीर जरूर माना कि राष्ट्रपति की यात्रा का पूरा तरीका बदल दिया गया।
कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल का खतरा
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि संभावित खतरे के तौर पर कंधे पर रखकर दागी जाने वाली मिसाइल यानी मैन-पोर्टेबल मिसाइल सिस्टम की आशंका जताई गई थी। ऐसे हथियारों का इस्तेमाल कम दूरी से विमानों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। इसी वजह से राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने अतिरिक्त सावधानी बरती।
सुरक्षा व्यवस्था में क्यों किया गया बदलाव?
राष्ट्रपति की सुरक्षा में सबसे महत्वपूर्ण चीज उनकी वास्तविक लोकेशन को गुप्त रखना होती है। यही वजह है कि इस पूरे ऑपरेशन में एयर फोर्स वन की गतिविधियों को सामान्य दिखाने की कोशिश की गई। बाहर से देखने वालों के लिए राष्ट्रपति एयर फोर्स वन में ही मौजूद दिखाई दे रहे थे, जबकि वास्तव में ट्रंप दूसरे सैन्य विमान से यात्रा कर रहे थे।
फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिकी अधिकारियों को मिली खुफिया जानकारी कितनी विश्वसनीय थी और ईरान की ओर से वास्तव में ऐसा कोई हमला करने की तैयारी थी या नहीं। लेकिन एक बात साफ है—खतरे की आशंका ने अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को राष्ट्रपति की यात्रा तक का पूरा प्लान बदलने पर मजबूर कर दिया।
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