ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
पुलिस की कार्यप्रणाली कैसी है और आम लोगों को थाने से लेकर सत्यापन तक किस तरह की सेवाएं मिल रही हैं, इसे जानने के लिए गाजियाबाद कमिश्नरेट की फीडबैक सेल लगातार लोगों से राय ले रही है। इसी क्रम में इस साल जनवरी से जुलाई के बीच करीब 86 हजार लोगों से फीडबैक लिया गया। पुलिस के मुताबिक, इनमें सिर्फ 34 प्रतिक्रियाएं नकारात्मक मिलीं। नकारात्मक फीडबैक मिलने के बाद पुलिस ने संबंधित मामलों की जांच कराई। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जहां पुलिसकर्मियों की लापरवाही या अनियमितता सामने आई, वहां कार्रवाई की गई। अब तक 30 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के खिलाफ लाइन हाजिर और निलंबन जैसी कार्रवाई की जा चुकी है।
हर महीने करीब 12 हजार लोगों से ली गई राय
डीसीपी मुख्यालय धवल जायसवाल के मुताबिक, पुलिस की सेवाओं को लेकर सीधे जनता से फीडबैक लेने की व्यवस्था पिछले साल मई में शुरू की गई थी। मई 2025 से जुलाई 2026 तक पुलिस को अलग-अलग सेवाओं से जुड़े करीब 1.56 लाख फीडबैक मिले। इनमें कुल 81 प्रतिक्रियाएं नकारात्मक थीं। सबसे ज्यादा शिकायतें जनशिकायत से जुड़े मामलों में मिलीं। ऐसे मामलों में 44 नकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आईं। इसके अलावा पासपोर्ट सत्यापन से संबंधित 23 नकारात्मक फीडबैक भी मिले। पुलिस का कहना है कि किसी भी नकारात्मक प्रतिक्रिया को केवल शिकायत मानकर छोड़ने के बजाय उसकी जांच कराई जाती है।
लापरवाही मिलने पर पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई
फीडबैक के आधार पर जब किसी पुलिसकर्मी की भूमिका संदिग्ध या शिकायत के अनुरूप पाई जाती है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाती है। अधिकारियों के मुताबिक, जांच में कर्तव्य के प्रति लापरवाही, उदासीनता या अनियमितता मिलने पर लाइन हाजिर और निलंबन जैसी कार्रवाई की गई है। पुलिस का दावा है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल शिकायतों की संख्या जुटाना नहीं, बल्कि पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय करना भी है।
नाबालिग की बरामदगी के मामले में रुपये मांगने का आरोप
ऐसा ही एक मामला नंदग्राम थाने से सामने आया। यहां तैनात दारोगा इंद्रेश कुमार पर नाबालिग की बरामदगी के मामले में पीड़ित परिवार से रुपये मांगने का आरोप लगा। शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच कराई गई। पुलिस के अनुसार, जांच में आरोप सही पाए गए। इसके बाद दारोगा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह शिकायत भी फीडबैक सेल के माध्यम से सामने आई थी।
वेव सिटी थाने के मुख्य आरक्षी पर भी कार्रवाई
इसी तरह वेव सिटी थाने में तैनात मुख्य आरक्षी आबिद के खिलाफ भी रुपये मांगने की शिकायत मिली। मामले की जांच कराई गई और पुलिस के अनुसार प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए गए। इसके बाद मुख्य आरक्षी को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
शिकायतों पर निगरानी बढ़ाने का दावा
डीसीपी सिटी धवल जायसवाल के मुताबिक, फीडबैक सेल के जरिए मिलने वाली शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है। खासतौर पर भ्रष्टाचार, रिश्वत मांगने या ड्यूटी में लापरवाही से जुड़ी शिकायतों की जांच कराई जा रही है। पुलिस का कहना है कि अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
कुल मिलाकर, फीडबैक सेल को पुलिस और आम जनता के बीच जवाबदेही बढ़ाने की एक कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, असली चुनौती यही होगी कि शिकायतों की जांच कितनी पारदर्शी और लगातार होती है और कार्रवाई के बाद पुलिस सेवाओं की गुणवत्ता में कितना सुधार आता है।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!