ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में सोमवार शाम एक बड़ा हादसा हो गया। लोनी बॉर्डर थाना क्षेत्र में जौहरी एनक्लेव मेट्रो स्टेशन के पास दिल्ली-सहारनपुर रोड पर एक तीन मंजिला इमारत की छत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के समय इमारत में पारस हार्डवेयर एंड सैनेटरी की दुकान चल रही थी। छत गिरने के बाद दुकान में मौजूद तीन लोग मलबे के नीचे फंस गए। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर सर्विस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव अभियान शुरू किया गया।
भारी सामान के वजन से गिरी छत?
हादसा शाम करीब 4:42 बजे हुआ। बताया गया कि दुकान की इमारत में बड़ी मात्रा में हार्डवेयर का सामान रखा हुआ था। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, भारी सामान के दबाव के चलते भूतल की छत और मेजेनाइन फ्लोर का हिस्सा अचानक टूटकर नीचे आ गया। छत गिरते ही दुकान में अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी।
दो लोगों को तुरंत बाहर निकाला गया
घटना की जानकारी मिलते ही फायर सर्विस की टीमें मौके पर पहुंचीं। पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से मलबे में फंसे दो लोगों को बाहर निकाल लिया गया। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। इसके बाद मलबे में एक और व्यक्ति के फंसे होने की जानकारी मिली। राहत टीमों ने सावधानी से मलबा हटाने का काम शुरू किया।
32 वर्षीय मुकेश यादव भी मलबे में फंसे थे
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान करीब 32 वर्षीय मुकेश यादव मलबे के काफी अंदर फंसे मिले। उन्हें काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया। मुकेश को अचेत अवस्था में एंबुलेंस से दिल्ली के जीटीबी अस्पताल रेफर किया गया।
जर्जर इमारत के बीच जारी रहा रेस्क्यू
रेस्क्यू टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इमारत का बाकी हिस्सा भी बेहद जर्जर था और उसके गिरने का खतरा बना हुआ था। इसके बावजूद पुलिस, फायर सर्विस, प्रशासन और अन्य राहत एजेंसियों ने सावधानी के साथ अभियान जारी रखा। मौके पर एसडीएम लोनी, एसीपी अंकुर विहार, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और नगर पालिका के अधिकारी भी मौजूद रहे। रेस्क्यू के लिए जेसीबी मशीनों के साथ फायर सर्विस और एसडीआरएफ की टीमों ने काम किया। बाद में एनडीआरएफ की टीम भी अत्याधुनिक लाइफ डिटेक्टर और प्रशिक्षित डॉग्स के साथ मौके पर पहुंची।
करीब आठ घंटे चला अभियान
एनडीआरएफ ने मलबे की जांच कर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि अंदर कोई और व्यक्ति फंसा हुआ न हो। दुकान के कर्मचारियों और मालिक से भी जानकारी ली गई। उन्होंने किसी अन्य व्यक्ति के अंदर मौजूद होने की बात से इनकार किया। करीब आठ घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद रात करीब 11 बजे अभियान समाप्त किया गया। इमारत की खराब हालत को देखते हुए प्रशासन ने बाकी मलबा हटाने का काम रोक दिया और भवन को सील करा दिया।
हादसे की वजह की जांच जारी
फिलहाल हादसे में घायल लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रशासन की ओर से हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। शुरुआती तौर पर भारी सामान और इमारत की जर्जर हालत को संभावित वजह माना जा रहा है, लेकिन हादसे की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
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