ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
गाजियाबाद के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। नया गाजियाबाद रेलवे स्टेशन के पास देश का सबसे आधुनिक “रेल गार्ड भवन” बनाने की योजना पर काम शुरू हो गया है। इस परियोजना का शिलान्यास रविवार को ओडिशा के जाजपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद डॉ. रबिंद्र नारायण बेहेरा ने किया। कार्यक्रम में रेलवे कर्मचारी संगठनों के लोग और बड़ी संख्या में रेलकर्मी मौजूद रहे।
यह भवन खास तौर पर
ट्रेन मैनेजरों (गार्ड) की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। रेलवे की
नौकरी में ट्रेन मैनेजर का रोल बहुत अहम माना जाता है, क्योंकि ट्रेन के संचालन से लेकर सुरक्षा और कई
जरूरी प्रक्रियाओं में उनकी जिम्मेदारी होती है। ऐसे में उनके लिए आराम, ठहरने और मीटिंग जैसी सुविधाएं मजबूत हों, तो काम करना भी आसान होता है।
कहां बनेगा नया भवन
और क्यों है ये जरूरी?
यह परियोजना नया
गाजियाबाद रेलवे स्टेशन के पास स्थित मौजूदा गार्ड भवन से जुड़ी है। जानकारी के
मुताबिक, ऑल इंडिया गार्ड काउंसिलिंग संस्था के दो भवन
हैं—एक झारखंड के गोमू में और दूसरा गाजियाबाद में लोहिया नगर के पास, नया गाजियाबाद स्टेशन के नजदीक। इन भवनों में
ट्रेन मैनेजरों की बैठकें होती हैं और गार्ड्स के ठहरने की व्यवस्था भी रहती है।
लंबे समय से गार्ड
काउंसिल की मांग थी कि इस भवन का जीर्णोद्धार (रेनोवेशन) किया जाए और इसे आधुनिक
सुविधाओं के हिसाब से तैयार किया जाए। अब रेलवे से जरूरी इजाजत मिलने के बाद इस
दिशा में काम शुरू हो गया है।
शिलान्यास किसने
किया, क्या कहा गया?
रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे गार्ड काउंसिल के महाअध्यक्ष देश के किसी
सांसद को बनाया जाता है। फिलहाल इस पद पर ओडिशा के जाजपुर से सांसद डॉ. रबिंद्र
नारायण बेहेरा हैं। बताया गया कि उन्होंने रेलवे से इजाजत दिलाने के बाद रविवार को
इस काम का शिलान्यास किया।
शिलान्यास कार्यक्रम
के दौरान सांसद ने यह भी कहा कि रेल गार्ड रेलवे संचालन की “रीढ़” होते हैं और
उनके लिए आराम व विश्राम की सुविधा देना जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि यह भवन न
सिर्फ गाजियाबाद, बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल के रूप में
स्थापित होगा। साथ ही, लक्ष्य रखा गया है कि भवन का निर्माण तय समय सीमा
के भीतर पूरा किया जाए।
क्या-क्या होंगी नई
सुविधाएं?
इस परियोजना की सबसे
बड़ी खासियत यह है कि इसे पूरी तरह आधुनिक जरूरतों के हिसाब से बनाया जाएगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, नए रेल गार्ड भवन में करीब 200 लोगों की क्षमता वाला एक मीटिंग हॉल बनाया जाएगा।
इस हॉल में गार्डों की बैठकें, प्रशिक्षण
(ट्रेनिंग) और विभागीय गतिविधियां आयोजित की जा सकेंगी।
इसके अलावा, गार्डों के ठहरने के लिए बेहतर सुविधाओं वाले
कमरे बनाए जाएंगे, ताकि ड्यूटी के बाद उन्हें आरामदायक जगह मिल सके।
भवन में एक आधुनिक कैंटीन की व्यवस्था भी होगी, जिससे कर्मचारियों
को खाने-पीने की सुविधा उसी परिसर में मिल जाए।
आज के समय में रेलवे
जैसी 24x7 सेवा में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए ठहरने
की सुविधा का सीधा असर उनकी सेहत और काम की क्वालिटी पर पड़ता है। ट्रेनिंग और
मीटिंग के लिए अलग से जगह मिलने से प्रशासनिक कामकाज भी व्यवस्थित हो सकता है।
ट्रेन मैनेजरों ने
उठाई पे-ग्रेड प्रमोशन की मांग
कार्यक्रम में सिर्फ
भवन की बात नहीं हुई, बल्कि ट्रेन मैनेजरों से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा भी
सामने आया। ट्रेन मैनेजर काउंसिल की तरफ से सांसद से मांग की गई कि ट्रेन मैनेजरों
की नियुक्ति 2800 पे ग्रेड पर होती है। नियम के अनुसार पूरी नौकरी
में चार प्रमोशन मिलते हैं और प्रमोशन के साथ पे-ग्रेड बढ़ता भी है।
लेकिन कर्मचारियों
का कहना है कि 2800 के पे-ग्रेड पर भर्ती होने के बाद चार प्रमोशन
मिलने के बावजूद वे 4200 पे-ग्रेड पर ही रिटायर हो जाते हैं। उनकी मांग है
कि बाकी की तरह उन्हें भी 4600
और 4800 पे-ग्रेड प्रमोशन
दिया जाए।
यह मांग इसलिए
महत्वपूर्ण है क्योंकि पे-ग्रेड का सीधा संबंध सैलरी, भत्तों और रिटायरमेंट बेनिफिट्स से होता है। अगर
पे-ग्रेड का स्केल बेहतर होगा, तो कर्मचारियों का
मनोबल भी बढ़ेगा और नौकरी में आगे बढ़ने का स्पष्ट रास्ता भी दिखेगा।
स्थानीय स्तर पर
क्या कहा गया?
मौके पर शहर विधायक
संजीव शर्मा भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि यह गाजियाबाद के लिए गर्व की बात है कि
यहां देशभर के ट्रेन मैनेजरों के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त भवन तैयार किया जा
रहा है। यह बयान इस बात की तरफ भी इशारा करता है कि गाजियाबाद धीरे-धीरे रेलवे
सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से एक अहम केंद्र बनता जा रहा है।
गाजियाबाद और रेल
स्टाफ को क्या फायदा होगा?
इस तरह के भवन का
सीधा फायदा रेलवे स्टाफ को मिलेगा, लेकिन इसका असर
अप्रत्यक्ष रूप से यात्रियों पर भी पड़ता है। जब ट्रेन मैनेजरों को आराम, रहने और ट्रेनिंग की बेहतर सुविधा मिलेगी, तो काम की दक्षता और सुरक्षा मानकों में भी सुधार
आ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, नए भवन के बनने के
बाद ट्रेन मैनेजरों को आधुनिक, सुरक्षित और
सुविधाजनक माहौल मिलेगा, जिससे उनकी कार्यक्षमता और मनोबल दोनों बढ़ने की
बात कही गई है।
कुल मिलाकर, नया गाजियाबाद स्टेशन के पास यह परियोजना सिर्फ
एक इमारत नहीं, बल्कि रेलवे कर्मचारियों की सुविधा, ट्रेनिंग और वेलफेयर से जुड़ा बड़ा कदम माना जा
सकता है। आने वाले समय में अगर यह तय समय पर पूरा होता है, तो गाजियाबाद को रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले
में एक नई पहचान मिल सकती है।
Jan 14, 2026
Read More
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!