ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
देश में बढ़ते नशे के कारोबार और युवाओं पर इसके गंभीर प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘नशा मुक्त युवा’ मूवमेंट की शुरुआत की है, जो अगले 100 हफ्तों तक चलेगा। इस अभियान का उद्देश्य युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाना और देश को नशा मुक्त बनाने की दिशा में काम करना है। आज नशे की समस्या केवल स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह सामाजिक, आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी बड़ी चुनौती बन चुकी है। नशीले पदार्थों की आसान उपलब्धता युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर रही है और कई परिवारों को बर्बादी की ओर धकेल रही है।
हर साल हजारों लोगों की जा रही जान
नशे की लत का सबसे खतरनाक असर लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024 में नशीले पदार्थों और शराब की लत से जुड़ी वजहों के कारण 13,955 लोगों की मौत हुई। इनमें सबसे बड़ी संख्या आत्महत्या के मामलों की रही। आंकड़ों के अनुसार, करीब 12,977 लोगों ने नशे से जुड़े मानसिक तनाव और परेशानियों के कारण आत्महत्या की। वहीं, 978 लोगों की मौत ड्रग ओवरडोज के कारण हुई।ये आंकड़े बताते हैं कि नशे की समस्या कितनी गंभीर हो चुकी है और इसका सबसे ज्यादा असर युवा वर्ग पर पड़ रहा है।
भारत में करोड़ों लोग नशे की गिरफ्त में
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में करोड़ों लोग अलग-अलग प्रकार के नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक:
• करीब 3.1 करोड़ लोग कैनबिस (गांजा, भांग, हशीश) का इस्तेमाल करते हैं।
• लगभग 2.3 करोड़ लोग अफीम और हेरोइन जैसे ओपियोइड्स के आदी हैं।
• करीब 1.18 करोड़ लोग सिंथेटिक ड्रग्स और नशीली गोलियों का सेवन करते हैं।
• इसके अलावा देश में 16 करोड़ से ज्यादा लोग शराब का सेवन करते हैं।
इन आंकड़ों से साफ है कि नशा केवल कुछ इलाकों की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे देश के सामने एक बड़ी चुनौती बन चुका है।
गोल्डन क्रिसेंट से भारत में पहुंच रहा ड्रग्स नेटवर्क
भारत में अवैध ड्रग्स की सप्लाई के लिए दो बड़े अंतरराष्ट्रीय रास्तों का इस्तेमाल किया जाता है। पहला है ‘गोल्डन क्रिसेंट’, जिसमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान शामिल हैं। इस क्षेत्र को दुनिया के सबसे बड़े अफीम उत्पादन क्षेत्रों में गिना जाता है। पाकिस्तान की सीमा से जुड़े होने के कारण पंजाब, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्य ड्रग्स तस्करी से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, साल 2025 में बड़ी मात्रा में हेरोइन जब्त की गई, जिसमें पंजाब से सबसे अधिक बरामदगी हुई।
गोल्डन ट्राएंगल बना दूसरा बड़ा खतरा
भारत के पूर्वी हिस्से में मौजूद ‘गोल्डन ट्राएंगल’ भी ड्रग्स तस्करी का बड़ा केंद्र है। इसमें म्यांमार, थाईलैंड और लाओस शामिल हैं। इस रास्ते से खासतौर पर मेथामफेटामाइन जैसे सिंथेटिक ड्रग्स भारत में पहुंचाए जाते हैं। म्यांमार में बड़े पैमाने पर सिंथेटिक ड्रग्स का उत्पादन होने के कारण पूर्वोत्तर राज्यों में इसकी तस्करी बड़ी चुनौती बन गई है। मिजोरम, मणिपुर और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में सुरक्षा एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं।
ड्रोन और पार्सल से ड्रग्स पहुंचाने का नया तरीका
पहले ड्रग्स की तस्करी के लिए पारंपरिक रास्तों का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन अब तस्करों ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है।पाकिस्तान सीमा से जुड़े इलाकों में ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थ गिराने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। ड्रोन से ड्रग्स पहुंचाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती बन चुका है। इसके अलावा तस्कर कूरियर और पार्सल सेवाओं का भी इस्तेमाल करते हैं, ताकि जांच एजेंसियों से बचा जा सके।
हजारों करोड़ रुपये का ड्रग्स जब्त
ड्रग्स नेटवर्क के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं। NCB और अन्य एजेंसियों की कार्रवाई में बड़ी संख्या में तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में देशभर में ड्रग्स तस्करी से जुड़े 1.48 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए गए। इस दौरान बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ जब्त किए गए, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत हजारों करोड़ रुपये बताई गई।
नशा मुक्त भारत के लिए बड़ी चुनौती
सरकार का ‘नशा मुक्त युवा’ अभियान ऐसे समय शुरू हुआ है, जब देश में ड्रग्स नेटवर्क लगातार नए तरीके अपना रहा है। युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए केवल कानून और कार्रवाई ही काफी नहीं है, बल्कि जागरूकता, शिक्षा और परिवारों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। नशे के खिलाफ लड़ाई में युवाओं की भागीदारी सबसे अहम होगी, क्योंकि देश का भविष्य स्वस्थ और जागरूक युवा शक्ति पर ही निर्भर करता है।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!