ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने यानी E20 फ्यूल का लक्ष्य तय समय से पहले हासिल कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इसके साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जहां बड़े स्तर पर एथेनॉल मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल किया जा रहा है। एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल का उद्देश्य सिर्फ प्रदूषण कम करना नहीं है, बल्कि पेट्रोलियम आयात पर देश की निर्भरता घटाना और किसानों की आय बढ़ाना भी है। हालांकि, भारत इस दिशा में नया खिलाड़ी है, जबकि अमेरिका और ब्राजील कई दशकों से एथेनॉल आधारित ईंधन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
एथेनॉल फ्यूल की शुरुआत अमेरिका और ब्राजील से हुई
दुनिया में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का इतिहास सबसे पहले अमेरिका और ब्राजील से जुड़ा है। साल 1970 के दशक में जब दुनिया ने तेल संकट का सामना किया, तब दोनों देशों ने पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना शुरू किया। आज अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा एथेनॉल उत्पादक देश है, जबकि ब्राजील दूसरे स्थान पर आता है। दोनों देशों ने एथेनॉल को अपने ऊर्जा सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा बना लिया है।
अमेरिका में मक्के से बनता है सबसे ज्यादा एथेनॉल
दुनिया में सबसे ज्यादा एथेनॉल उत्पादन अमेरिका करता है। वैश्विक उत्पादन का करीब 54 प्रतिशत हिस्सा अकेले अमेरिका तैयार करता है। अमेरिका में एथेनॉल बनाने के लिए मुख्य रूप से मक्के (Corn) का इस्तेमाल किया जाता है। वहां मक्के की खेती बड़े पैमाने पर होती है, इसलिए बड़ी-बड़ी इंडस्ट्रीज मक्के से एथेनॉल बनाकर इसे ईंधन के रूप में इस्तेमाल करती हैं। अमेरिका में पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले ज्यादातर ईंधन में पहले से ही 10 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाया जाता है। अब कई जगहों पर इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत तक करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
ब्राजील का एथेनॉल मॉडल गन्ने पर आधारित
एथेनॉल उत्पादन में ब्राजील दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है। अमेरिका और ब्राजील मिलकर दुनिया का लगभग 80 प्रतिशत एथेनॉल तैयार करते हैं। ब्राजील में एथेनॉल उत्पादन के लिए सबसे ज्यादा गन्ने का इस्तेमाल किया जाता है। गन्ने की बड़ी पैदावार के कारण वहां बायोफ्यूल इंडस्ट्री काफी मजबूत हो चुकी है।ब्राजील में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाना अनिवार्य है। वहां पेट्रोल में लगभग 27 से 30 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाया जाता है। इतना ही नहीं, ब्राजील ने साल 2003 से ही फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देना शुरू कर दिया था। ये वाहन पेट्रोल और एथेनॉल दोनों तरह के ईंधन पर चल सकते हैं। यही कारण है कि कुछ वर्षों में ब्राजील में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की संख्या काफी तेजी से बढ़ गई।
भारत का एथेनॉल मॉडल: गन्ना, चावल और मक्का
एथेनॉल उत्पादन के मामले में भारत अब दुनिया का तीसरा बड़ा देश बन गया है। भारत ने E20 पेट्रोल का लक्ष्य हासिल करके ऊर्जा क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत की है। भारत में एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने के रस, टूटे हुए चावल और मक्के से तैयार किया जाता है। सरकार का लक्ष्य सिर्फ पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे कई बड़े उद्देश्य हैं:
1. कच्चे तेल के आयात पर खर्च कम करना
2. किसानों की आय बढ़ाना
3. ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार पैदा करना
4. प्रदूषण कम करना
5. स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना
भारत के सामने अभी भी कई चुनौतियां
हालांकि भारत ने E20 लक्ष्य हासिल कर लिया है, लेकिन एथेनॉल आधारित ईंधन को पूरी तरह सफल बनाने के लिए कुछ चुनौतियां भी हैं। देश में पर्याप्त मात्रा में एथेनॉल उत्पादन क्षमता तैयार करना, सभी वाहनों को E20 के अनुकूल बनाना और किसानों से कच्चे माल की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करना बड़ी चुनौतियां हैं। इसके अलावा पुराने वाहनों में ज्यादा एथेनॉल मिश्रण के प्रभाव को लेकर भी विशेषज्ञ लगातार अध्ययन कर रहे हैं।
एथेनॉल से बदलेगा भारत का ऊर्जा भविष्य
भारत का E20 मिशन ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अमेरिका और ब्राजील के अनुभव से सीख लेते हुए भारत अब अपने संसाधनों के आधार पर एथेनॉल अर्थव्यवस्था तैयार कर रहा है। आने वाले वर्षों में सरकार एथेनॉल मिश्रण को और बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। अगर यह योजना सफल होती है तो इससे देश का तेल आयात खर्च कम होगा और लाखों किसानों को भी आर्थिक लाभ मिल सकता है।
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