Census 2027: पहली बार होगी जाति गणना, जनगणना में जुड़ेंगे कई नए सवाल
Census 2027 के दूसरे चरण में पहली बार जाति की गिनती होगी। जनगणना में माता-पिता की जन्मतिथि और जन्मस्थान की जानकारी भी दर्ज की जाएगी। जानिए पूरी प्रक्रिया और नए बदलाव।
Census 2027: पहली बार होगी जाति गणना, जनगणना में जुड़ेंगे कई नए सवाल
  • Category: भारत

देश में होने वाली अगली जनगणना को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। जनगणना 2027 के दूसरे चरण में पहली बार जाति से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी। इसके अलावा इस बार लोगों से उनके माता-पिता की जन्मतिथि और जन्मस्थान की जानकारी भी मांगी जा सकती है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, जनगणना प्रक्रिया में कई नए बदलाव किए गए हैं, जिनका उद्देश्य देश की सामाजिक और जनसांख्यिकीय स्थिति की अधिक विस्तृत जानकारी जुटाना है।


17 अगस्त से शुरू होगा जनगणना का दूसरा चरण

जनगणना 2027 का दूसरा चरण 17 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। हालांकि, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले इलाकों में यह प्रक्रिया 1 से 30 सितंबर तक आयोजित की जाएगी। इससे पहले 17 अगस्त से 30 अगस्त तक लोगों को स्व-गणना यानी Self Enumeration की सुविधा दी जाएगी। इसमें लोग ऑनलाइन माध्यम से अपनी और अपने परिवार की जानकारी खुद दर्ज कर सकेंगे।


पहली बार दर्ज होगी जाति की जानकारी

जनगणना के इतिहास में पहली बार जाति आधारित जानकारी को शामिल किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, जाति की जानकारी व्यक्ति द्वारा खुद बताए गए विवरण के आधार पर दर्ज की जाएगी। इसके लिए किसी जाति प्रमाण पत्र या अन्य दस्तावेज दिखाना जरूरी नहीं होगा। अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए अलग विकल्प उपलब्ध होंगे, जबकि अन्य जातियों की जानकारी अलग तरीके से दर्ज की जाएगी।


जाति सत्यापन के लिए प्रमाण पत्र जरूरी नहीं

जनगणना में जाति बताने वाले व्यक्ति को किसी भी दस्तावेज के जरिए अपनी जाति साबित करने की आवश्यकता नहीं होगी। उत्तरदाता जिस तरह अपनी जाति का नाम बताएगा, उसे उसी आधार पर रिकॉर्ड किया जाएगा। इसके लिए डिजिटल सिस्टम और तकनीक की मदद से आंकड़ों को व्यवस्थित करने की योजना बनाई गई है।


2011 में सामने आई थीं हजारों जातियां

साल 2011 की सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) में स्व-घोषणा के आधार पर 45 हजार से ज्यादा जातियों के नाम सामने आए थे। इतनी बड़ी संख्या में अलग-अलग नाम सामने आने के कारण आंकड़ों को व्यवस्थित करना मुश्किल हुआ था। हालांकि, इस बार डिजिटल टूल्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से डेटा को बेहतर तरीके से वर्गीकृत करने की तैयारी है।


पहली बार माता-पिता की जन्म जानकारी भी होगी दर्ज

जनगणना 2027 के दूसरे चरण में पहली बार लोगों के माता-पिता की जन्मतिथि और जन्मस्थान से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी। यह जानकारी नागरिकता से जुड़े मानदंडों को समझने में मददगार मानी जा रही है। इससे पहले 2010 में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) तैयार करते समय लोगों से राष्ट्रीयता संबंधी जानकारी ली गई थी। हालांकि, उस समय स्पष्ट किया गया था कि केवल इस जानकारी के आधार पर किसी व्यक्ति को नागरिकता का अधिकार नहीं मिलेगा।


NPR को Census 2027 से किया गया अलग

पहले योजना थी कि 2021 की जनगणना के साथ NPR प्रक्रिया भी दोहराई जाएगी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण जनगणना स्थगित हो गई थी। अब NPR प्रक्रिया को Census 2027 से अलग कर दिया गया है। जनगणना और NPR दोनों की प्रक्रिया अलग-अलग तरीके से संचालित की जाएगी।


क्या है Self Enumeration की सुविधा?

जनगणना में Self Enumeration यानी स्व-गणना एक ऑनलाइन प्रक्रिया है, जिसमें लोग खुद अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए नागरिकों को जनगणना अधिकारी (Enumerator) का इंतजार नहीं करना होगा। लोग ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी भरकर जमा कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे जनगणना प्रक्रिया तेज, आसान और अधिक प्रभावी बनेगी।


Census 2027 क्यों है खास?

Census 2027 कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है। पहली बार जाति आधारित जानकारी, माता-पिता की जन्म संबंधी जानकारी और डिजिटल स्व-गणना जैसी सुविधाएं इसमें शामिल की जा रही हैं। इन आंकड़ों का इस्तेमाल देश की सामाजिक संरचना, सरकारी योजनाओं और नीतियों को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है।

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