ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक अहम बदलाव किया गया है। जम्मू संभाग के उधमपुर और कठुआ जिलों में 21 स्थानों पर अब सेना की जगह केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी CRPF की तैनाती की जा रही है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है। सेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की अलग-अलग जिम्मेदारियों को देखते हुए तैनाती का नया प्लान तैयार किया गया है। इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि जम्मू से सेना को पूरी तरह हटाया जा रहा है। बल्कि कुछ खास इलाकों में सुरक्षा की जिम्मेदारी CRPF को देकर सेना को दूसरे महत्वपूर्ण सैन्य कार्यों के लिए इस्तेमाल करने की रणनीति अपनाई जा रही है।
21 जगहों पर CRPF संभालेगी जिम्मेदारी
जानकारी के मुताबिक, उधमपुर और कठुआ में करीब 21 स्थानों पर CRPF की कंपनियां तैनात की जाएंगी। इन इलाकों में सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने के लिए लगभग 2,100 जवानों की तैनाती की बात सामने आई है। इनमें CRPF की सामान्य इकाइयों के साथ कुछ विशेष प्रशिक्षित जवानों की भी भूमिका हो सकती है। जरूरत के हिसाब से आतंकवाद विरोधी अभियानों और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को संभालने के लिए CRPF को लगाया जाएगा। यह इलाका रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। जम्मू संभाग में आतंकवाद और घुसपैठ की चुनौती को देखते हुए सुरक्षा बलों की तैनाती हमेशा से संवेदनशील मुद्दा रही है।
सेना की जिम्मेदारी अब कहां ज्यादा रहेगी?
सेना को पूरी तरह हटाने के बजाय उसकी भूमिका को कुछ क्षेत्रों में और अधिक केंद्रित किया जा रहा है। LoC यानी नियंत्रण रेखा जैसे बेहद संवेदनशील इलाकों में सेना की मौजूदगी महत्वपूर्ण बनी रहेगी। LoC पर सीमा की निगरानी, घुसपैठ रोकना और सैन्य अभियानों जैसी जिम्मेदारियां मुख्य रूप से सेना के पास रहती हैं। ऐसे में अगर आंतरिक इलाकों में सुरक्षा की जिम्मेदारी CRPF संभालती है, तो सेना को सीमा से जुड़े अपने मुख्य कामों पर ज्यादा ध्यान देने का मौका मिलेगा। इसे सुरक्षा बलों के बीच जिम्मेदारियों के बेहतर बंटवारे के तौर पर देखा जा रहा है।
CRPF क्यों महत्वपूर्ण है?
CRPF देश का सबसे बड़ा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है और जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से सुरक्षा अभियानों का हिस्सा रहा है। आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियान, भीड़ नियंत्रण और संवेदनशील इलाकों में कानून-व्यवस्था संभालने में CRPF की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। जम्मू-कश्मीर में भी CRPF के जवान लंबे समय से पुलिस और दूसरे सुरक्षा बलों के साथ मिलकर काम करते रहे हैं। ऐसे में कुछ इलाकों में सेना की जगह CRPF को जिम्मेदारी देना कोई पूरी तरह नया प्रयोग नहीं है। बल्कि बदलती सुरक्षा जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग बलों की विशेषज्ञता का इस्तेमाल करने की कोशिश के तौर पर इसे देखा जा सकता है।
करीब 2,100 जवानों की तैनाती
21 स्थानों पर CRPF की तैनाती का मतलब बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी है। करीब 2,100 जवानों के आने से इन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। इन जवानों की जिम्मेदारी सिर्फ किसी एक तरह के खतरे तक सीमित नहीं होगी। उन्हें इलाके की सुरक्षा, संवेदनशील स्थानों की निगरानी और जरूरत पड़ने पर दूसरे सुरक्षा अभियानों में भी लगाया जा सकता है। हालांकि किसी भी सुरक्षा व्यवस्था की सफलता सिर्फ जवानों की संख्या पर निर्भर नहीं करती। स्थानीय पुलिस, खुफिया एजेंसियों और सेना के साथ बेहतर तालमेल भी उतना ही जरूरी होता है।
आतंकवाद विरोधी रणनीति में बदलाव
जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ समय से सुरक्षा एजेंसियां आतंकवाद के खिलाफ अपनी रणनीति को लगातार बदल रही हैं। अब सिर्फ सीमा पर निगरानी ही नहीं, बल्कि अंदरूनी इलाकों में आतंकियों के नेटवर्क और उनकी मदद करने वालों पर भी नजर रखी जा रही है। इस तरह के माहौल में सेना और CRPF के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा सुरक्षा व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है। अगर सेना को कुछ आंतरिक क्षेत्रों की जिम्मेदारी से राहत मिलती है, तो उसके जवानों और संसाधनों को सीमा और सैन्य अभियानों पर ज्यादा केंद्रित किया जा सकता है। वहीं CRPF स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर अंदरूनी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल सकती है।
क्या सेना की भूमिका कम हो रही है?
इस बदलाव को सेना की भूमिका कम होने के तौर पर देखना सही नहीं होगा। सेना अभी भी जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।खासकर LoC और दूसरे बेहद संवेदनशील इलाकों में सेना की भूमिका अहम बनी हुई है। नए बदलाव का मुख्य उद्देश्य जिम्मेदारियों को अलग-अलग सुरक्षा बलों के बीच बेहतर तरीके से बांटना है। सरल शब्दों में कहें तो जिस काम के लिए जिस बल की विशेषज्ञता ज्यादा उपयोगी है, उसे उसी क्षेत्र में ज्यादा जिम्मेदारी देने की कोशिश की जा रही है।
आने वाले समय में क्या असर होगा?
अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि 21 स्थानों पर CRPF की नई तैनाती जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है। सुरक्षा बलों के बीच तालमेल, स्थानीय स्तर पर खुफिया जानकारी और तेजी से कार्रवाई करने की क्षमता इसका बड़ा हिस्सा होगी। जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लगातार बदलती परिस्थितियों के हिसाब से तैयार करना जरूरी है। सेना और CRPF की जिम्मेदारियों के इस नए बंटवारे से एक तरफ सेना को अपनी मुख्य सैन्य जिम्मेदारियों पर ध्यान देने का मौका मिलेगा, वहीं CRPF को आंतरिक सुरक्षा में बड़ी भूमिका मिलेगी। कुल मिलाकर जम्मू के 21 इलाकों में CRPF की तैनाती सुरक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। इसका असली असर आने वाले समय में जमीन पर सुरक्षा स्थिति और दोनों बलों के बीच तालमेल से ही साफ होगा।
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