ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
देशभर में चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) चल रही है। इसका मकसद वोटर लिस्ट को अपडेट और साफ करना है। लेकिन कई बड़े नाम इसमें फंस गए हैं। नोबेल विजेता अमर्त्य सेन, क्रिकेटर मोहम्मद शमी के बाद अब पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश को नोटिस मिला है। उन्हें अपनी पहचान साबित करने को कहा गया।
ये
प्रक्रिया अच्छी लगती है लेकिन कई लोगों को परेशानी हो रही। खासकर बुजुर्गों या
नामी लोगों को। एडमिरल प्रकाश ने कहा—हमने फॉर्म भर दिया था, फिर भी जाना पड़ रहा। ये
सुनकर लगता है सिस्टम में कुछ कमी है।
एडमिरल
अरुण प्रकाश को क्या हुआ?
एडमिरल
अरुण प्रकाश भारतीय नौसेना के पूर्व चीफ हैं। देश सेवा के लिए सम्मानित। उन्हें और
उनकी पत्नी को SIR फॉर्म
भरने के बाद भी नोटिस आया। चुनाव आयोग ने कहा—व्यक्तिगत तौर पर आकर पहचान साबित
करो।
प्रकाश
ने इसे असुविधाजनक बताया। बोले—ये प्रक्रिया बुजुर्गों के लिए मुश्किल है।
उन्होंने EC से
फॉर्म में बदलाव की मांग की। मतलब डिजाइन ऐसा हो कि आसानी से भर सकें। ये बात कई
लोगों की हो रही है।
अमर्त्य
सेन और शमी का पुराना केस
ये पहला
केस नहीं। अमर्त्य सेन जैसे बड़े इकोनॉमिस्ट को भी SIR में पहचान प्रूफ मांगा गया। वे बोले—मेरा नाम
दुनिया जानती है, फिर भी ये? क्रिकेटर
मोहम्मद शमी को भी परेशानी हुई।
शमी जैसे
प्लेयर जो स्टेडियम भर लोगों के सामने खेलते हैं, उनकी पहचान पर सवाल? ये सोचने
वाली बात है। SIR अच्छा स्टेप है लेकिन तरीका गलत लग रहा। कई
लोग सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे—EC को सुधारना चाहिए।
SIR क्यों चला रहा चुनाव आयोग?
चुनाव
आयोग कहता है—वोटर लिस्ट में फर्जी नाम हटाने के लिए SIR जरूरी। कई जगह
डुप्लिकेट एंट्री, गलत डिटेल्स हैं। इसलिए हर वोटर को फॉर्म
भरना पड़ रहा। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके हैं।
लेकिन
प्रॉब्लम ये कि नामी लोग भी फंस रहे। क्या उनका आधार, वोटर ID, पासपोर्ट काफी नहीं? फिर नोटिस क्यों? लगता है सिस्टम ऑटोमेटेड है, लेकिन चेकिंग में
इंसानी गलती हो रही।
आम आदमी
को क्या परेशानी?
बड़े
नामों की बात अलग। लेकिन लाखों आम लोग SIR में उलझे हैं। गांव-शहर में BOOTH लेवल ऑफिसर घर-घर जा रहे। फॉर्म भरना, डॉक्यूमेंट
जमा करना—ये सब टाइम लेता है। बुजुर्ग, बीमार लोग परेशान।
कई जगह
अफसरों ने कहा—नोटिस आया तो जाना पड़ेगा। वरना वोटर लिस्ट से नाम कट सकता। ये डर
फैला रहा। EC को
ऐसी प्रक्रिया बनानी चाहिए जो आसान हो।
एडमिरल
प्रकाश ने क्या सुझाव दिया?
प्रकाश
ने EC को लेटर लिखा। बोले—SIR
फॉर्म को सरल बनाओ। ऑनलाइन वैरिफिकेशन बढ़ाओ। बुजुर्गों को छूट दो।
उनकी बात सही लगती है। देश सेवा करने वाले को पहचान साबित करनी पड़े—ये शर्म की
बात।
अगर
फॉर्म में नाम, पता,
आधार लिंक हो तो ऑटो चेक हो सकता। लेकिन अभी मैनुअल प्रोसेस ज्यादा
है।
पहले भी
हुए ऐसे विवाद
पिछले
चुनावों में भी वोटर लिस्ट क्लीनिंग पर सवाल उठे। लेकिन SIR नया स्टेप है। कई राज्य
जैसे यूपी, बंगाल में तेजी से चल रही। लेकिन अमर्त्य सेन का
केस वायरल हुआ। शमी ने भी ट्वीट किया। अब एडमिरल—ये चेन बन रही।
लोग पूछ
रहे—क्या EC बड़े
नामों को टारगेट कर रहा? जवाब ना। लेकिन इमेज खराब हो रही।
चुनाव
आयोग को क्या करना चाहिए?
EC को
फॉर्म डिजाइन चेक करना चाहिए। डिजिटल वैरिफिकेशन बढ़ाओ। आधार, PAN, पासपोर्ट से लिंक करो। हेल्पलाइन मजबूत करो। बुजुर्गों, दिव्यांगों को घर पर सर्विस दो।
अगर ये
हो गया तो SIR स्मूथ
चलेगी। वोटर लिस्ट क्लीन होगी और विवाद कम।
राजनीतिक
रंग क्यों आ रहा?
कुछ
पार्टियां बोल रही—SIR से वोट सुप्रेशन हो रहा। मतलब कुछ वोटरों को डराकर वोटिंग से रोकना। EC
खारिज करता है। लेकिन बड़े नाम फंसने से शक बढ़ा।
अगले
चुनाव नजदीक हैं। SIR सही हो तो फेयर इलेक्शन। गलत तो डाउट।
आगे क्या
होगा?
एडमिरल
प्रकाश नोटिस पर क्या करेंगे—जल्द पता चलेगा। EC जवाब देगा। लेकिन ये केस सिस्टम सुधार की मांग तेज
करेगा। आम आदमी को आसानी चाहिए।
Jan 14, 2026
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