ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर एक स्पष्ट और व्यापक प्रोटोकॉल तैयार किया जाएगा। प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने कहा कि यह तय किया जाएगा कि किन परिस्थितियों में और किस तरीके से पैलेट गन का इस्तेमाल किया जा सकता है।
पैलेट गन के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है, लेकिन पुलिस को बल प्रयोग की सीमाओं का भी ध्यान रखना होगा। अदालत ने साफ किया कि किसी भी आंदोलन के दौरान जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने वाले पुलिस अधिकारियों को बिना वजह सुरक्षा नहीं दी जानी चाहिए। CJI सूर्यकांत ने कहा कि एक तरफ पुलिस ज्यादती को सही नहीं ठहराया जा सकता, वहीं दूसरी तरफ प्रदर्शन की आड़ में गंभीर अपराध करने वालों को भी संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।
छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने पर छूट
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि दिल्ली समेत अन्य राज्य सरकारें छात्र आंदोलनों में शामिल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने पर विचार कर सकती हैं। हालांकि, यह राहत केवल उन छात्रों को मिलेगी जिनका गंभीर या जघन्य अपराधों से जुड़ा कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। यह टिप्पणी केंद्र सरकार के उस बयान के बाद आई, जिसमें सरकार ने कहा था कि नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में हुए प्रदर्शनों समेत अन्य छात्र आंदोलनों में शामिल छात्रों के मामलों को लेकर वह गंभीरता से विचार कर रही है।
केंद्र ने एफआईआर पर दिया था आश्वासन
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस मामले को लेकर कानूनी प्रक्रिया पर चर्चा की गई है। वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने अदालत को बताया कि कई राज्यों में छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल मुकदमे खत्म करने का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि राज्यों के साथ बातचीत के बाद मामले को लेकर दोबारा अदालत का रुख किया जाएगा।
पुलिस कार्रवाई के वीडियो अदालत में पेश
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़े करीब 300 वीडियो सौंपे गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रदर्शनकारियों और छात्रों के साथ मारपीट की गई। उन्होंने अदालत से मांग की कि पुलिस आयुक्त और आरएएफ अधिकारियों से जवाब मांगा जाए कि पैलेट गन और अन्य बल प्रयोग की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने कहा कि पुलिस कार्रवाई में शामिल अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
पैलेट गन पर दिल्ली पुलिस की व्यवस्था पर सवाल
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने कहा कि दिल्ली पुलिस के पास पैलेट गन इस्तेमाल को लेकर कोई स्पष्ट स्थायी आदेश नहीं है। उन्होंने कहा कि याचिका का उद्देश्य पुलिस को सुरक्षा साधनों से वंचित करना नहीं है, लेकिन पैलेट गन जैसे हथियारों के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट नियम जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे हथियारों के इस्तेमाल से गंभीर चोटों का खतरा रहता है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले भी कहा था कि सिर्फ इसलिए पुलिस कार्रवाई को सही नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि कोई आंदोलन चल रहा है। अदालत ने कहा था कि संविधान शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार देता है और इसे सुनिश्चित करना जरूरी है। अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में पैलेट गन इस्तेमाल को लेकर दिशा-निर्देश तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।
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