ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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छिजारसी में बिजली के अवैध कनेक्शनों पर बड़ा एक्शन
नोएडा के छिजारसी इलाके में अवैध बिजली कनेक्शनों को लेकर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। डूब क्षेत्र में चल रहे कथित अवैध बिजली नेटवर्क के खिलाफ अभियान चलाकर करीब 3 हजार कनेक्शन काट दिए गए। कार्रवाई के दौरान 19 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नाराजगी और अधिकारियों से जवाब मांगने के बाद तेज हुई।
मामला सामने आने के बाद बिजली विभाग और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। अब अधिकारियों का कहना है कि अवैध कनेक्शनों और बिजली चोरी के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
छिजारसी और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में लोग रह रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, यह इलाका हिंडन नदी के डूब क्षेत्र से जुड़ा है, जहां निर्माण और बिजली कनेक्शन को लेकर पहले से नियम और पाबंदियां लागू हैं।
इसके बावजूद यहां बड़ी संख्या में बिजली कनेक्शन चलने की बात सामने आई। आरोप है कि कई जगहों पर अनधिकृत तरीके से बिजली पहुंचाई जा रही थी और लोगों से इसके बदले पैसे लिए जा रहे थे। इसी पूरे नेटवर्क को लेकर अब जांच और कार्रवाई शुरू हुई है।
अधिकारियों की कार्रवाई में करीब 3 हजार अवैध बिजली कनेक्शन काटे गए हैं। इसके साथ ही अवैध बिजली लाइन और केबल नेटवर्क को भी हटाने की कार्रवाई की गई।
यह कार्रवाई सिर्फ बिजली चोरी रोकने तक सीमित नहीं है। प्रशासन अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इतने बड़े स्तर पर यह नेटवर्क कितने समय से चल रहा था और इसे चलाने में किन लोगों की भूमिका थी।
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, अलग-अलग कार्रवाई में बड़ी संख्या में एफआईआर भी दर्ज की गई हैं। एक रिपोर्ट में हिंडन डूब क्षेत्र में करीब 40 एफआईआर दर्ज होने की जानकारी दी गई है, जबकि पहले की कार्रवाई में 19 लोगों पर केस दर्ज होने की बात सामने आई थी।
इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल पैसों को लेकर है। सामने आई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि छिजारसी इलाके में करीब 13 हजार घरों से हर महीने 1.5 से 1.8 करोड़ रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही थी।
आरोप है कि लोगों को निजी या अनधिकृत तरीके से बिजली उपलब्ध कराई जाती थी और इसके बदले उनसे पैसा लिया जाता था। हालांकि, इस रकम और पूरे नेटवर्क से जुड़े आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
छिजारसी में बिजली व्यवस्था को लेकर सामने आई शिकायतों के बाद मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचा। रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने इस मामले पर नाराजगी जताई और अधिकारियों से जवाब मांगा।
इसके बाद बिजली विभाग और प्रशासन की कार्रवाई तेज हुई। अधिकारियों ने इलाके में अभियान चलाकर अवैध कनेक्शन काटने शुरू किए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।
इस मामले ने सिर्फ बिजली चोरी पर ही सवाल नहीं उठाए हैं, बल्कि यह भी सवाल खड़ा किया है कि इतने बड़े इलाके में अवैध कनेक्शनों का नेटवर्क लंबे समय तक अधिकारियों की नजर से कैसे बचा रहा।
अगर हजारों घरों तक बिजली की लाइनें पहुंची थीं और लोगों से नियमित रूप से पैसा लिया जा रहा था, तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं मिली? यही सवाल अब जांच का अहम हिस्सा बन सकता है।
फिलहाल अवैध कनेक्शन काटने के साथ-साथ मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि इस नेटवर्क के पीछे कौन लोग थे और बिजली की सप्लाई किस तरह संचालित की जा रही थी।
इस कार्रवाई का असर उन हजारों परिवारों पर भी पड़ा है, जिनके कनेक्शन काटे गए हैं। ऐसे में आगे प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती होगी—एक तरफ अवैध बिजली नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना और दूसरी तरफ इलाके में रहने वाले लोगों के लिए नियमों के मुताबिक बिजली व्यवस्था को लेकर स्पष्ट समाधान निकालना।
छिजारसी का यह मामला अब सिर्फ बिजली चोरी का मामला नहीं रह गया है। इसमें सरकारी विभागों की निगरानी, अवैध कॉलोनियों में सुविधाओं की व्यवस्था और लंबे समय से चल रहे कथित नेटवर्क की जवाबदेही जैसे कई सवाल जुड़े हैं। आने वाले दिनों में जांच से यह साफ होगा कि इस पूरे मामले में कितने लोग शामिल थे और उनके खिलाफ कितनी बड़ी कार्रवाई होती है।
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