ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास ट्रैफिक को बेहतर तरीके से संभालने के लिए बड़ी योजना तैयार की जा रही है। इसमें यात्रियों और मालवाहक वाहनों की आवाजाही को अलग करने पर जोर दिया गया है। ग्रेटर नोएडा महायोजना-2041 में बदलाव कर फ्रेट मूवमेंट के लिए अलग कनेक्टिविटी तैयार करने की योजना पर चर्चा हुई है। इसका मकसद यह है कि भारी मालवाहक वाहन एयरपोर्ट तक सामान पहुंचाते समय यात्री ट्रैफिक में न फंसें।
लॉजिस्टिक हब से एयरपोर्ट तक एलिवेटेड रोड
योजना के तहत मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब से जेवर एयरपोर्ट तक छह लेन की एलिवेटेड रोड बनाने का प्रस्ताव है। यह सड़क वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के समानांतर बनाई जाने की योजना है। इसका सबसे बड़ा फायदा एयर कार्गो को हो सकता है। लॉजिस्टिक हब में पहुंचने वाला सामान सीधे एयरपोर्ट के कार्गो टर्मिनल तक पहुंच सकेगा। इससे माल ढुलाई का समय कम हो सकता है और सड़क पर भारी वाहनों का दबाव भी घट सकता है।
गंगा एक्सप्रेसवे से भी बेहतर कनेक्टिविटी
नोएडा-ग्रेटर नोएडा से गंगा एक्सप्रेसवे तक पहुंच आसान बनाने के लिए हापुड़ बाईपास तक 105 मीटर चौड़ी सड़क बनाने की भी योजना है। कनेक्टिविटी बढ़ने के बाद ग्रेटर नोएडा की गंगा एक्सप्रेसवे से दूरी और यात्रा समय दोनों कम हो सकते हैं। योजना के मुताबिक, इस कनेक्शन से गंगा एक्सप्रेसवे तक पहुंचने में करीब 30 से 45 मिनट का समय लग सकता है।
एयरपोर्ट के विकास के साथ बढ़ेगा माल ट्रैफिक
नोएडा एयरपोर्ट सिर्फ यात्रियों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है। आने वाले समय में यहां एयर कार्गो और लॉजिस्टिक्स की गतिविधियां भी बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में अगर मालवाहक ट्रकों के लिए अलग और सीधी सड़क तैयार होती है तो इसका फायदा उद्योगों और कारोबारियों को मिल सकता है। ग्रेटर नोएडा पहले से ही कई औद्योगिक और लॉजिस्टिक गतिविधियों का केंद्र बन रहा है। एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और लॉजिस्टिक हब के बीच बेहतर कनेक्टिविटी बनने से पूरे इलाके की कारोबारी गतिविधियों को गति मिल सकती है।
ट्रैफिक दबाव कम करने की कोशिश
इस योजना का एक और फायदा यह होगा कि यात्री वाहनों और भारी मालवाहक वाहनों को एक ही रास्ते पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे एयरपोर्ट की तरफ जाने वाले सामान्य ट्रैफिक को भी राहत मिल सकती है। अगर प्रस्तावित सड़कें और एलिवेटेड कॉरिडोर समय पर तैयार होते हैं तो नोएडा एयरपोर्ट के आसपास का पूरा क्षेत्र एक बड़े ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित हो सकता है।
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