ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ग्रेटर नोएडा वेस्ट की ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में रहने वाले हजारों परिवारों के सामने इन दिनों पानी की गुणवत्ता एक बड़ी चिंता बन गई है। घर की टोंटी से आने वाला पानी, जिसे लोग रोजाना पीने और दूसरे घरेलू कामों में इस्तेमाल करते हैं, कई जगह बीमारी की वजह बन रहा है। पिछले कुछ महीनों में 15 से ज्यादा सेक्टर और सोसायटियों से दूषित पानी की शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। कुछ जगह पानी के नमूनों में ई-कोलाई और कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मिलने के बाद लोगों के बीमार पड़ने के मामले भी सामने आए हैं।
पानी की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल
नोएडा एक्सटेंशन यानी ग्रेटर नोएडा वेस्ट में पिछले कुछ वर्षों में आबादी तेजी से बढ़ी है। यहां बड़ी संख्या में ग्रुप हाउसिंग सोसायटियां हैं, जिनमें हजारों परिवार रहते हैं। अधिकांश सोसायटियों में पानी की सप्लाई ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के जरिए होती है। पानी की कमी होने पर कई जगह बोरिंग के पानी का भी इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि उन्हें मिलने वाले पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच आखिर कितनी गंभीरता से की जा रही है।
पानी की टंकियों की सफाई पर सवाल
निवासियों का सबसे बड़ा आरोप सोसायटियों में बनी पानी की टंकियों की सफाई को लेकर है। उनका कहना है कि कई जगह टंकियों की लंबे समय तक सफाई नहीं होती। कुछ निवासी दावा करते हैं कि कई सोसायटियों में महीनों या वर्षों तक टैंकों की उचित सफाई नहीं की जाती। इससे पानी में गंदगी और बैक्टीरिया पनपने की आशंका बढ़ जाती है। वहीं, एओए और बिल्डर प्रबंधन के बीच जिम्मेदारी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं होने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
सिर्फ पानी का सैंपल लेना काफी नहीं
निवासियों का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद पानी के सैंपल लेना जरूरी है, लेकिन सिर्फ सैंपल लेने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उनके मुताबिक पानी की टंकियों की नियमित सफाई, पाइपलाइन की जांच और पानी की गुणवत्ता की लगातार निगरानी के लिए स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए। सेक्टर-1 एक्टिव जीएनडब्ल्यू एलाइस रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश शुक्ला के मुताबिक, सोसायटी निवासियों से नियमित पानी का बिल लिया जाता है, इसलिए पानी की गुणवत्ता और टैंकों की सफाई की जिम्मेदारी को लेकर स्पष्ट नियम होने चाहिए।
कई सोसायटियों में लोग हो चुके हैं बीमार
रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा वेस्ट की कई सोसायटियों में दूषित पानी के कारण बड़ी संख्या में लोगों के बीमार पड़ने की शिकायत सामने आ चुकी है।बताया गया है कि सुपरटेक इको विलेज-1 में करीब 400 लोग, इको विलेज-2 में अलग-अलग घटनाओं में करीब 250 और 350 लोग, पंचशील हाइनिश में करीब 250 लोग और अरिहंत आर्डेन में 300 से 400 लोग प्रभावित हुए थे। इसके अलावा अजनारा होम्स में करीब 600, गौर सौंदर्यम में करीब 200 और आस्था ग्रीन सोसायटी में करीब 200 लोगों के बीमार होने की बात सामने आई है।
करोड़ों के फ्लैट, लेकिन साफ पानी की चिंता
एस सिटी सोसायटी के निवासी आत्मराम राठौर ने पानी की समस्या को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर घर खरीदने वाले लोगों को अगर पीने के लिए साफ पानी भी नहीं मिल रहा है तो यह गंभीर समस्या है। निवासियों की मांग है कि प्राधिकरण ऐसी सोसायटियों में पानी की नियमित जांच के साथ-साथ टैंकों की सफाई की भी निगरानी करे।
जिम्मेदारी तय करने की जरूरत
दूषित पानी की समस्या सिर्फ स्वास्थ्य से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि इसके साथ जवाबदेही भी जुड़ी हुई है। अगर पानी की जांच में बैक्टीरिया मिलते हैं तो यह तय होना जरूरी है कि समस्या पानी की सप्लाई में है, सोसायटी की टंकियों में, पाइपलाइन में या बोरिंग के पानी में। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में आबादी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में साफ और सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था केवल निवासियों की मांग नहीं, बल्कि बुनियादी जरूरत है। नियमित जांच, टैंकों की सफाई और जिम्मेदारी तय करने की प्रभावी व्यवस्था ही इस समस्या को लंबे समय में रोक सकती है।
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