ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जिसे जेवर एयरपोर्ट कहते हैं, को लेकर लोगों का सब्र जवाब देने लगा है। रनवे बन गया, टर्मिनल बिल्डिंग खड़ी हो गई, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और पैसेंजर सुविधाएं भी लगभग तैयार हैं। फिर भी उद्घाटन की तारीख फिक्स नहीं हो पा रही। आम आदमी सोचता है—सब कुछ रेडी है तो देरी क्यों?
यह
एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर के लिए गेम चेंजर बनेगा। पश्चिमी यूपी, हरियाणा, राजस्थान तक के लोगों को फायदा होगा। लेकिन अभी सिर्फ इंतजार ही हो रहा
है। चलिए समझते हैं असली वजह।
निर्माण
का स्टेटस: सब कुछ तैयार लेकिन...
अधिकारियों
की मानें तो जेवर एयरपोर्ट का फिजिकल काम 99% पूरा हो चुका है। रनवे, टैक्सी
वे, टर्मिनल, कार्गो एरिया, पार्किंग, फायर स्टेशन—सब सेट है। अत्याधुनिक
टेक्नोलॉजी लगाई गई है ताकि पैसेंजर्स को वर्ल्ड क्लास फैसिलिटी मिले।
लेकिन
एयरपोर्ट चलाना सिर्फ बिल्डिंग बनाने जितना आसान नहीं। कई स्टेप्स हैं जो पूरे
होने चाहिए। जैसे सुरक्षा चेक, ऑडिट और लाइसेंस। ये प्रोसेस में टाइम लगता है।
सुरक्षा
मंजूरी क्यों इतनी जरूरी?
सबसे
बड़ा मुद्दा सेफ्टी का है। नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) और DGCA से क्लियरेंस लेना पड़ता है। इसमें आता है—फायर सेफ्टी, रनवे चेक, एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट, इमरजेंसी सिस्टम।
जेवर को
ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाया गया है, यानी जीरो से नया। यहां CCTV, स्मार्ट
कैमरा, बायोमेट्रिक एंट्री, फायर
अलार्म, स्कैनर—सब लगे हैं। मॉक ड्रिल हो चुकी हैं। पुलिस और
सेंट्रल एजेंसी के साथ प्लान रेडी है। फिर भी हर कोने को परफेक्ट चेक करना पड़
रहा।
अधिकारी
साफ कहते हैं—हजारों पैसेंजर्स आएंगे, एक छोटी सी गलती बड़ा रिस्क हो सकती है। इसलिए
जल्दबाजी नहीं।
यात्रियों
की सेफ्टी पहले, देरी बाद में
कल्पना
कीजिए—एयरपोर्ट खुला और बीच में कोई प्रॉब्लम हो गई। इसलिए वॉच टावर, गश्त, कंट्रोल रूम सब टेस्ट हो रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि सेफ्टी से
कोई समझौता नहीं। ये देरी भविष्य के लिए सही है।
पिछले
एयरपोर्ट्स के उदाहरण देखें तो सेफ्टी चेक में महीनों लग जाते हैं। जेवर में भी
यही हो रहा। लेकिन अच्छी बात ये कि प्रोजेक्ट ट्रैक पर है।
जेवर से
क्षेत्र बदलेगा—रोजगार और बिजनेस बूम
जब जेवर
खुलेगा तो यमुना एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरल, गंगा एक्सप्रेसवे से कनेक्ट होगा।
मेट्रो और RRTS भी प्लान में हैं। दिल्ली से आने-जाने का
टाइम और पैसे दोनों बचेंगे।
रोजगार
की बात करें तो हजारों जॉब्स आएंगी। होटल, टैक्सी, लॉजिस्टिक्स, रिटेल, वेयरहाउस—सब बढ़ेंगे। मल्टीनेशनल कंपनियां आ
रही हैं। ग्रेटर नोएडा और आसपास के गांव-शहरों में नई जिंदगी आएगी। युवाओं को लोकल
जॉब्स मिलेंगी।
निवेश भी
तेज होगा। कार्गो हब बनेगा, एविएशन बिजनेस ग्रो करेगा। ये सिर्फ एयरपोर्ट नहीं, पूरा
रीजन का फ्यूचर है।
आसपास के
इलाकों पर क्या फायदा?
ग्रेटर
नोएडा, यमुना अथॉरिटी एरिया में
प्रॉपर्टी वैल्यू बढ़ेगी। छोटे बिजनेस वाले खुश होंगे। ट्रांसपोर्ट सर्विसेज को नया
बूस्ट मिलेगा। पूर्वी यूपी और राजस्थान के लोग दिल्ली एयरपोर्ट की भीड़ से राहत
पाएंगे।
लेकिन
देरी से निवेशक भी परेशान हैं। सबको जल्द खुलने की उम्मीद है।
अधिकारियों
का आखिरी बयान: जल्द खुलेगा
यमुना
अथॉरिटी के CEO राकेश
कुमार सिंह कहते हैं—एयरपोर्ट रेडी है, बस फाइनल क्लियरेंस
बाकी। DGCA और PMO से तारीख फिक्स
होगी। कोई जल्दबाजी नहीं, लेकिन डिले नॉट टू मच।
ट्रायल
और चेक चल रहे हैं। पहली फ्लाइट कब—ये जल्द पता चलेगा। तब तक सबको सब्र रखना
पड़ेगा।
जेवर
एयरपोर्ट का फ्यूचर ब्राइट
कुल
मिलाकर जेवर देरी के बावजूद बड़ा प्रोजेक्ट है। ये NCR को नई हाइट देगा। सेफ्टी पहले रखना सही फैसला है।
लोकल लोग उत्साहित हैं—रोजगार, डेवलपमेंट सब आएगा।
Jan 14, 2026
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