ग्रेटर नोएडा में 108 देशों की 1200 छात्राओं का मिशन, मिलकर बनाएंगी दो सैटेलाइट
ग्रेटर नोएडा के गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में 108 देशों की करीब 1200 छात्राएं ‘मिशन शक्तिसैट’ के तहत दो सैटेलाइट तैयार करेंगी। इस अंतरराष्ट्रीय पहल का उद्देश्य छात्राओं को स्पेस टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और सैटेलाइट निर्माण का व्यावहारिक अनुभव देना है।
ग्रेटर नोएडा में 108 देशों की 1200 छात्राओं का मिशन, मिलकर बनाएंगी दो सैटेलाइट
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ग्रेटर नोएडा से अंतरिक्ष की दुनिया में एक बड़ी और खास पहल शुरू होने जा रही है। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में दुनिया के 108 देशों की करीब 1200 छात्राएं एक साथ मिलकर दो सैटेलाइट तैयार करेंगी। इस पहल को ‘मिशन शक्तिसैट’ नाम दिया गया है। इसका मकसद सिर्फ सैटेलाइट बनाना नहीं, बल्कि दुनिया भर की छात्राओं को स्पेस टेक्नोलॉजी से जोड़ना और उनमें वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना भी है।


108 देशों की छात्राएं होंगी शामिल

इस मिशन की सबसे खास बात इसकी अंतरराष्ट्रीय भागीदारी है। अलग-अलग देशों से आई छात्राएं एक साथ काम करते हुए सैटेलाइट निर्माण की प्रक्रिया को समझेंगी। इससे उन्हें स्पेस साइंस, इंजीनियरिंग और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के बारे में व्यावहारिक अनुभव मिलने की उम्मीद है। एक ही प्रोजेक्ट पर अलग-अलग देशों की छात्राओं का साथ काम करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।


मिलकर तैयार होंगी दो सैटेलाइट

‘मिशन शक्तिसैट’ के तहत दो सैटेलाइट तैयार किए जाने हैं। छात्राएं इन सैटेलाइट के निर्माण से जुड़ी अलग-अलग गतिविधियों में हिस्सा लेंगी। इस पूरी प्रक्रिया के जरिए छात्राओं को यह समझने का मौका मिलेगा कि एक सैटेलाइट को तैयार करने में किस तरह की तकनीकी जानकारी और टीमवर्क की जरूरत होती है।यह पहल उन छात्राओं के लिए खास मौका है, जो भविष्य में अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में करियर बनाना चाहती हैं।


महिला सशक्तीकरण से जुड़ा बड़ा कदम

इस प्रोजेक्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू महिला सशक्तीकरण भी है। आमतौर पर स्पेस और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में पुरुषों की भागीदारी ज्यादा दिखाई देती है। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में छात्राओं को एक अंतरराष्ट्रीय स्पेस प्रोजेक्ट से जोड़ना एक सकारात्मक संदेश देता है। मिशन के जरिए छात्राओं को यह दिखाने की कोशिश की जा रही है कि विज्ञान और अंतरिक्ष तकनीक जैसे क्षेत्रों में उनके लिए भी बड़े अवसर मौजूद हैं।


ग्रेटर नोएडा बना अंतरराष्ट्रीय मंच

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में इस कार्यक्रम के आयोजन से ग्रेटर नोएडा को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की उम्मीद है। 108 देशों की छात्राओं का एक जगह जुटना इस क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह कार्यक्रम भारत की बढ़ती वैज्ञानिक क्षमता और अंतरिक्ष क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी को भी सामने लाने का अवसर है।


सिर्फ सैटेलाइट नहीं, सीखने का भी मौका

मिशन शक्तिसैट को केवल एक सैटेलाइट निर्माण परियोजना के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य छात्राओं को तकनीकी प्रशिक्षण और टीमवर्क का अनुभव देना भी है। अलग-अलग देशों से आने वाली छात्राएं अपने अनुभव और विचार साझा करेंगी। इससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने की समझ भी विकसित हो सकती है।


भारत के लिए क्यों खास है यह मिशन?

भारत पिछले कुछ वर्षों में अंतरिक्ष क्षेत्र में लगातार अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है। ऐसे समय में युवाओं, खासकर छात्राओं को स्पेस टेक्नोलॉजी से जोड़ने वाली पहल भारत की वैज्ञानिक सोच को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है। ‘मिशन शक्तिसैट’ के जरिए ग्रेटर नोएडा में होने वाला यह अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम आने वाली पीढ़ी की छात्राओं को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकता है। कुल मिलाकर, 108 देशों की 1200 छात्राओं का दो सैटेलाइट बनाने के लिए एक साथ आना सिर्फ एक तकनीकी प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और महिला सशक्तीकरण का भी बड़ा उदाहरण है।

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