ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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नोएडा में लंबे समय से फ्लैट का इंतजार कर रहे घर खरीदारों की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। करीब 12 से 15 साल पहले अपनी जमा पूंजी और बैंक लोन से फ्लैट बुक कराने वाले कुछ खरीदारों का आरोप है कि अब बिल्डर पुरानी बुकिंग को छोटी-छोटी वजहों से कैंसिल कर रहे हैं। इसके बाद उन्हीं फ्लैटों को मौजूदा बाजार कीमत पर दोबारा बेचने की कोशिश की जा रही है। कई खरीदारों के मुताबिक, जिस फ्लैट के लिए उन्होंने वर्षों पहले करीब 50 लाख रुपये दिए थे, उसकी मौजूदा बाजार कीमत अब डेढ़ से दो करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। ऐसे में पुरानी बुकिंग रद्द होने से खरीदारों को भारी आर्थिक नुकसान का डर सता रहा है।
नोएडा अथॉरिटी में 100 से ज्यादा शिकायतें
इस तरह के मामलों को लेकर नोएडा अथॉरिटी में 100 से ज्यादा शिकायतें पहुंचने की बात सामने आई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कई मामलों में बिल्डरों ने बिना किसी बड़ी वजह के पुरानी बुकिंग कैंसिल कर दी और खरीदारों से वर्षों पहले जमा की गई रकम वापस लेने को कहा। नोएडा अथॉरिटी की एसीईओ वंदना त्रिपाठी ने भी ऐसे मामलों में बड़ी संख्या में शिकायतें मिलने की बात कही है। हालांकि, उनका कहना है कि इन मामलों पर कार्रवाई करना अथॉरिटी के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और संबंधित मामले रेरा के दायरे में आते हैं।
खरीदारों का सवाल- 15 साल बाद कौन बचाएगा अधिकार?
घर खरीदारों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि उन्होंने वर्षों तक अपनी रकम बिल्डर के पास फंसी रहने दी। इस दौरान कई लोगों को किराए के घर में रहना पड़ा और लगातार मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा। अब जब उन्हें फ्लैट मिलने की उम्मीद है, तो बुकिंग कैंसिल होने का खतरा सामने आ गया है। बायर्स एसोसिएशन से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर बिल्डर वर्षों बाद भी बुकिंग रद्द कर सकता है तो खरीदारों के अधिकारों की सुरक्षा कैसे होगी।
रेरा के फैसलों पर भी उठे सवाल
खरीदारों का एक वर्ग रेरा की प्रक्रिया को लेकर भी परेशान है। बायर्स एसोसिएशन से जुड़े सजीव साहनी का कहना है कि कई मामलों में खरीदार रेरा तक पहुंचते हैं और उनके पक्ष में फैसला भी आता है, लेकिन समस्या उसके बाद शुरू होती है। उनका दावा है कि कई मामलों में बिल्डर रेरा के आदेशों का पालन नहीं करते। ऐसे में पीड़ित खरीदारों को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए हाईकोर्ट तक जाना पड़ सकता है। इससे वर्षों से परेशान खरीदारों के लिए विवाद और लंबा खिंच जाता है।
ट्रांसफर चार्ज भी बनी बड़ी परेशानी
पुरानी बुकिंग कैंसिलेशन के अलावा नोएडा में फ्लैटों के ट्रांसफर मेमोरेंडम यानी TM चार्ज को लेकर भी खरीदार सवाल उठा रहे हैं। आरोप है कि अलग-अलग बिल्डर इसके लिए अलग-अलग रकम वसूल रहे हैं। कुछ मामलों में 300 रुपये प्रति वर्गफुट, तो कहीं 500 या 700 रुपये प्रति वर्गफुट तक चार्ज लेने की बात सामने आई है। ऐसे में 1800 से 2000 वर्गफुट के फ्लैट पर ट्रांसफर चार्ज कई लाख रुपये तक पहुंच सकता है। खरीदारों का कहना है कि इस शुल्क के लिए एक समान नीति होनी चाहिए।
कब्जे की जगह समझौते का दबाव?
खरीदारों का आरोप है कि कुछ मामलों में बिल्डर कब्जा देने के बजाय समझौते का दबाव बना रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों तक पैसा जमा करने, किराया देने और इंतजार करने के बाद अब उन्हें अपने ही घर के लिए दोबारा संघर्ष करना पड़ रहा है। नोएडा में पहले से ही अधूरे प्रोजेक्ट, लंबित रजिस्ट्री और कब्जे में देरी जैसे मुद्दे घर खरीदारों के लिए बड़ी समस्या हैं। ऐसे में पुराने फ्लैटों की बुकिंग कैंसिल होने के मामले ने एक नई चिंता खड़ी कर दी है। खरीदारों की मांग है कि पुरानी बुकिंग रद्द करने पर रोक लगाने के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं, ट्रांसफर चार्ज की एक समान व्यवस्था हो और नियमों का उल्लंघन करने वाले बिल्डरों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई का प्रावधान किया जाए।
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