ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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नोएडा के सेक्टर-119 स्थित 'द अरण्या' ग्रुप हाउसिंग परियोजना में फ्लैट दिलाने के नाम पर निवेशकों से करीब ₹200 करोड़ की कथित धोखाधड़ी की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मामले की जांच तेज करते हुए नोएडा प्राधिकरण के ग्रुप हाउसिंग और नियोजन विभाग के दो अधिकारियों को मूल दस्तावेजों के साथ तलब किया। जांच के दौरान कई अहम तथ्य सामने आए हैं, जिससे प्राधिकरण की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है।
CBI ने मांगे मूल दस्तावेज
सूत्रों के अनुसार, ग्रुप हाउसिंग विभाग के प्रबंधक विवेक गोयल और नियोजन विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक वैभव गुप्ता परियोजना से जुड़े मूल रिकॉर्ड और उनकी प्रतियां लेकर CBI कार्यालय पहुंचे। जांच एजेंसी ने दस्तावेजों की प्रमाणिकता सुनिश्चित करने के लिए दोनों अधिकारियों से प्रतियों पर हस्ताक्षर करने को कहा। बताया जा रहा है कि शुरुआत में दोनों अधिकारियों ने हस्ताक्षर करने में हिचक दिखाई, लेकिन CBI की सख्ती के बाद उन्होंने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान जांच अधिकारियों ने रिकॉर्ड के रखरखाव और प्रक्रिया को लेकर नाराजगी भी जताई।
अधिकारियों से पूछे गए कई अहम सवाल
सूत्रों के मुताबिक, लंबे समय से ग्रुप हाउसिंग विभाग में तैनात रहने के बावजूद विवेक गोयल परियोजना से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। इस पर CBI ने परियोजना से संबंधित दस्तावेजों और जानकारी को लेकर सवाल उठाए।
जांच एजेंसी ने परियोजना से जुड़े कई बिंदुओं पर प्रमाणित दस्तावेज मांगे हैं, जिनमें शामिल हैं:
• बिल्डर को परियोजना का आवंटन कब किया गया।
• परियोजना का कब्जा कब सौंपा गया।
• आवंटन के समय कितनी राशि जमा कराई गई।
• वर्तमान में बिल्डर पर कितना बकाया है।
• बकाया वसूली के लिए कितनी बार नोटिस जारी किए गए।
• कितने टावर और फ्लैट बन चुके हैं।
• कितने टावर और फ्लैट अभी अधूरे हैं।
• कितने फ्लैटों की रजिस्ट्री हो चुकी है और कितनी लंबित है।
रह रहे खरीदारों की स्थिति पर भी मांगी रिपोर्ट
CBI ने परियोजना में वर्तमान में रह रहे लोगों की स्थिति से जुड़ी जानकारी भी मांगी है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परियोजना के दौरान सभी नियमों का पालन किया गया था या नहीं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि बकाया वसूली में कहीं प्रशासनिक लापरवाही तो नहीं बरती गई और निवेशकों के साथ हुई कथित धोखाधड़ी में किन-किन लोगों की जवाबदेही बनती है।
बिल्डर ही नहीं, प्राधिकरण की भूमिका भी जांच के दायरे में
मामले की जांच अब केवल बिल्डर तक सीमित नहीं रह गई है। CBI इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों ने परियोजना की निगरानी, बकाया वसूली और नियमों के पालन में अपनी जिम्मेदारियां सही ढंग से निभाईं या नहीं। जांच एजेंसी द्वारा जुटाए जा रहे दस्तावेज और रिकॉर्ड आगे की कार्रवाई में अहम भूमिका निभा सकते हैं। यदि जांच में किसी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल CBI दस्तावेजों की जांच कर रही है और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहन पड़ताल जारी है। इस जांच पर परियोजना में निवेश करने वाले हजारों खरीदारों की नजर टिकी हुई है, जिन्हें लंबे समय से अपने फ्लैट और न्याय का इंतजार है।
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