ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सोमवार को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के लीगल एड फंड में ₹1 करोड़ का योगदान देने की घोषणा की। यह फंड NEET से जुड़े हालिया विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस मामलों का सामना कर रहे छात्रों और प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया गया है। सिब्बल ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों और प्रदर्शनकारियों को कानूनी परेशानियों का सामना नहीं करना चाहिए। उन्होंने देशभर के वकीलों से भी इस पहल में सहयोग करने की अपील की।
छात्रों के लिए बनेगा कानूनी सहायता नेटवर्क
कपिल सिब्बल ने बताया कि इस फंड के माध्यम से अलग-अलग राज्यों में छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों पर नजर रखी जाएगी। इसके लिए वकीलों का एक नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जो जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता उपलब्ध कराएगा। उन्होंने कहा कि बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों की निगरानी की जाएगी ताकि उन्हें समय पर कानूनी मदद मिल सके।
FIR वापस लेने की उठाई मांग
सिब्बल ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है और ऐसे मामलों में छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि जहां भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उन्हें वापस लिया जाए। उनके अनुसार, यदि किसी छात्र या प्रदर्शनकारी को केवल विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के कारण कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है, तो उसे उचित कानूनी सहायता मिलनी चाहिए।
CJP बनाएगी विशेष वेबसाइट
CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि संगठन एक विशेष वेबसाइट तैयार करेगा, जिसमें उन छात्रों की जानकारी उपलब्ध होगी जिनके खिलाफ पुलिस मामले दर्ज किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस प्लेटफॉर्म के जरिए ऐसे वकील भी जुड़ सकेंगे जो मुफ्त (प्रो बोनो) या अन्य माध्यमों से कानूनी सहायता देना चाहते हैं। इससे प्रभावित छात्रों तक कानूनी मदद पहुंचाने की प्रक्रिया आसान होगी।
देशभर के वकीलों से सहयोग की अपील
कपिल सिब्बल ने बताया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से ₹1 करोड़ का योगदान दिया है और अब देशभर के अधिवक्ताओं से भी इस फंड में सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह पहल उन लोगों के समर्थन के लिए है जो उनके अनुसार कानून के दुरुपयोग का सामना कर रहे हैं। उनका मानना है कि वकीलों की जिम्मेदारी केवल अदालत तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंद लोगों को न्याय दिलाने में भी उनकी अहम भूमिका होती है।
राजनीतिक और कानूनी बहस तेज
NEET परीक्षा और उससे जुड़े विरोध-प्रदर्शनों को लेकर पहले से ही राजनीतिक माहौल गर्म है। विभिन्न राजनीतिक दल इस मुद्दे पर अलग-अलग राय रख रहे हैं। इसी बीच कपिल सिब्बल द्वारा लीगल एड फंड में योगदान की घोषणा ने इस बहस को नया आयाम दे दिया है। हालांकि, छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों और उनकी वैधता पर अंतिम निर्णय संबंधित अदालतों और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होगा।
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