ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
उत्तर प्रदेश की राजनीति में आज का दिन यादों और बयानों वाला रहा। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की जयंती के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान सीएम योगी ने कल्याण सिंह को सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि एक ऐसे फैसले लेने वाले मुख्यमंत्री के रूप में याद किया जिनका नाम यूपी की राजनीति के बड़े मोड़ों से जुड़ा रहा है। श्रद्धांजलि कार्यक्रम में योगी का फोकस कल्याण सिंह के शासन, उनके फैसलों और उस दौर की परिस्थितियों पर रहा।
लखनऊ में
श्रद्धांजलि, फिर आया बड़ा बयान
सीएम योगी ने कल्याण
सिंह की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी के
पहले मुख्यमंत्री कल्याण सिंह थे। योगी ने 1991 का जिक्र करते हुए
कहा कि जब कल्याण सिंह ने उस समय राज्य की कमान संभाली थी, तब प्रदेश में अराजकता और गुंडागर्दी का माहौल
था। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी योजनाओं का फायदा किसानों, गरीबों और युवाओं तक ठीक से नहीं पहुंच रहा था।
योगी के इस बयान का
मतलब साफ था—वह कल्याण सिंह के कार्यकाल को “व्यवस्था सुधारने” से जोड़कर देख रहे
हैं। साथ ही, उन्होंने यह संदेश भी दिया कि उस दौर में हालात
मुश्किल थे, लेकिन नेतृत्व के फैसलों ने दिशा बदली।
“भगवान राम के लिए सत्ता कुर्बान करने में संकोच
नहीं”
कार्यक्रम के दौरान
सीएम योगी ने राम जन्मभूमि आंदोलन का जिक्र करते हुए कल्याण सिंह को याद किया।
उन्होंने कहा कि जब आंदोलन अपने चरम पर था, तब रामभक्तों की
भावनाओं का सम्मान करते हुए कल्याण सिंह ने अपने आराध्य भगवान राम के लिए सत्ता तक
कुर्बान करने में जरा भी संकोच नहीं किया। यह लाइन आज के भाषण की सबसे ज्यादा
चर्चा वाली बात बन गई।
योगी ने यह भी कहा
कि उस समय कल्याण सिंह को अस्थिर करने के लिए साजिशें रची गईं। उनके मुताबिक, एक तरफ अव्यवस्था और कुशासन था और दूसरी तरफ
हिंदू समाज “500 साल की गुलामी से आजाद होने” की बात कर रहा था।
इसी माहौल में कल्याण सिंह ने जिम्मेदारी संभाली थी।
“गुलामी के ढांचे” वाली बात
सीएम योगी ने अपने
भाषण में यह भी कहा कि पूर्व सीएम कल्याण सिंह ने “गुलामी के ढांचे” को हटाने की
जिम्मेदारी अपने ऊपर ली। इस बात को उनके समर्थक राम मंदिर आंदोलन के संदर्भ में
देखते हैं, क्योंकि यही वह दौर था जब यह मुद्दा पूरे देश की
राजनीति का केंद्र बना हुआ था।
ऐसे बयानों का असर
अक्सर दो तरह से होता है—एक तरफ समर्थक इसे “साहस और आस्था” के रूप में देखते हैं, दूसरी तरफ विरोधी दल इसे राजनीतिक संदेश मानते
हैं। लेकिन इस दिन योगी का टोन श्रद्धांजलि वाला रहा, जिसमें उन्होंने कल्याण सिंह के फैसले और योगदान
को प्रमुखता से रखा।
“सुशासन, विकास
और राष्ट्रवादी मिशन” की पहचान
सीएम योगी ने कल्याण
सिंह के कार्यकाल को सुशासन, विकास और
“राष्ट्रवादी मिशन” को आगे बढ़ाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि लोग
उन्हें आज भी इसी रूप में याद करते हैं। योगी ने यह भी जोड़ा कि कल्याण सिंह आज
हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन विधायक, मुख्यमंत्री, सांसद और राज्यपाल के रूप में उनकी सेवाएं हमेशा
याद रहेंगी।
यहां योगी ने कल्याण
सिंह के पूरे राजनीतिक सफर को एक फ्रेम में रखने की कोशिश की—कि उन्होंने अलग-अलग
जिम्मेदारियां निभाईं और उनका असर यूपी और देश की राजनीति में लंबे समय तक रहा।
सोशल मीडिया पर भी
साझा किया संदेश
श्रद्धांजलि के
साथ-साथ सीएम योगी ने सोशल मीडिया पर भी एक वीडियो पोस्ट कर कल्याण सिंह को याद
किया। पोस्ट में उन्होंने उन्हें राम मंदिर आंदोलन का “अडिग सेनानी” बताया और कहा
कि उन्होंने निष्ठा, त्याग और समर्पण के साथ जन-कल्याणकारी नीतियों और
मजबूत प्रशासनिक संकल्प से यूपी के विकास को नई गति दी। उन्होंने कल्याण सिंह के
जीवन को समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण का उदाहरण भी कहा।
आज के दौर में जब
राजनीति का बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया पर चलता है, ऐसे
पोस्ट का मतलब सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं रह जाता। यह एक तरह से पार्टी कार्यकर्ताओं
और समर्थकों के लिए संदेश भी होता है—कि नेतृत्व किन मूल्यों और किन नेताओं को
अपना आदर्श मानता है।
क्यों अहम है ये
पूरा कार्यक्रम?
कल्याण सिंह की
जयंती पर योगी का बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यूपी में राजनीति
लगातार तेज है और हर दल अपने पुराने नेताओं और “विरासत” को नए संदर्भ में पेश करता
है। योगी ने इस मौके पर 1991
की स्थिति, कानून-व्यवस्था, योजनाओं का लाभ और राम जन्मभूमि आंदोलन—इन सब
बातों को एक साथ जोड़कर कल्याण सिंह की छवि को मजबूत नेतृत्व के रूप में रखा।
इसके साथ ही, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि राज्य की राजनीति
में “सुशासन” और “विकास” की चर्चा सिर्फ आज की नहीं, बल्कि
पहले के कुछ कार्यकालों से भी जोड़ी जाती रही है।
आगे क्या संदेश
जाएगा?
ऐसे मौके पर दिए गए
भाषण कई बार आने वाले राजनीतिक नैरेटिव की दिशा भी तय करते हैं। कल्याण सिंह को
“सत्ता कुर्बान करने” वाला नेता बताकर योगी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि बड़े
फैसलों के लिए राजनीतिक कीमत चुकाने का साहस भी नेतृत्व का हिस्सा होता है। यह बात
समर्थकों के बीच भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाती है और पार्टी के अंदर एकता का भाव भी
मजबूत करती है।
अब देखने वाली बात
यह होगी कि आने वाले दिनों में दूसरे नेता या दल इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं, और क्या यह श्रद्धांजलि कार्यक्रम सिर्फ स्मृति
तक सीमित रहता है या फिर यूपी की सियासत में इसे बड़े संदर्भ में लिया जाता है।
Jan 14, 2026
Read More
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!