ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के बीच बढ़ती दूरी अब खुलकर नजर आने लगी है। सहारनपुर में 6 सितंबर को प्रस्तावित सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की रैली स्थगित कर दी गई है। सपा ने इसके पीछे खराब मौसम और भारी बारिश की आशंका को वजह बताया है, लेकिन राष्ट्रीय लोकदल इसे राजनीतिक माहौल से जोड़कर देख रहा है। रैली स्थगित होने के बाद पश्चिमी यूपी की सियासत में कई सवाल उठ रहे हैं। क्या कार्यक्रम सिर्फ मौसम की वजह से टला है या फिर इसके पीछे राजनीतिक दबाव की भी भूमिका है?
6 सितंबर की रैली हुई स्थगित
सपा के राष्ट्रीय महासचिव और रैली के आयोजक चौधरी रुद्रसैन ने बुधवार को कार्यक्रम स्थगित किए जाने की जानकारी दी। उनके मुताबिक, 6 सितंबर को भारी बारिश की संभावना और मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए रैली टालने का फैसला किया गया। उन्होंने बताया कि अखिलेश यादव से बातचीत के बाद रैली की नई तारीख तय की जाएगी। माना जा रहा है कि कार्यक्रम अक्टूबर के अंतिम सप्ताह या नवंबर के पहले सप्ताह में आयोजित हो सकता है। सपा की ओर से इसे पूरी तरह मौसम से जुड़ा फैसला बताया गया है।
RLD ने राजनीतिक विरोध का दावा किया
दूसरी तरफ राष्ट्रीय लोकदल ने रैली स्थगित होने को अलग नजरिए से देखा है। RLD का कहना है कि अखिलेश यादव की ओर से जयंत चौधरी और चौधरी परिवार को लेकर की गई टिप्पणी के बाद पश्चिमी यूपी में विरोध का माहौल बना। दरअसल, अखिलेश यादव की ‘चवन्नी से रुपया’ वाली टिप्पणी के बाद जाट समाज और चौधरी परिवार के सम्मान को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई थी। जयंत चौधरी ने भी इस टिप्पणी पर नाराजगी जाहिर करते हुए इसे जाट समाज के सम्मान से जोड़ दिया था। RLD का दावा है कि इसी मुद्दे को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 36 बिरादरी के बीच नाराजगी बढ़ी और सपा की प्रस्तावित रैली के बहिष्कार की बात सामने आई।
‘चौधरी परिवार हमारा सम्मान’
रैली रद्द होने के बाद RLD के राष्ट्रीय प्रवक्ता रोहित अग्रवाल ने सपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चौधरी परिवार उनके लिए सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक है और इस पर टिप्पणी स्वीकार नहीं की जाएगी। RLD का यह बयान बताता है कि दोनों दलों के बीच विवाद अब सिर्फ नेताओं के बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि पश्चिमी यूपी के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों से भी जोड़ा जा रहा है।
आमने-सामने थीं दोनों पार्टियों की रैलियां
सहारनपुर में दोनों दलों के कार्यक्रमों का समय भी राजनीतिक रूप से काफी अहम था। 3 सितंबर को जयंत चौधरी की ‘स्वाभिमान रैली’ प्रस्तावित थी, जबकि इसके तीन दिन बाद 6 सितंबर को अखिलेश यादव का ‘युवा योद्धा सम्मेलन’ होना था। इस वजह से सहारनपुर को दोनों दलों के शक्ति प्रदर्शन के बड़े मंच के तौर पर देखा जा रहा था। एक तरफ RLD जाट और पारंपरिक चौधरी परिवार के समर्थन को मजबूत करने की कोशिश में है, तो दूसरी ओर सपा अपने PDA समीकरण को लेकर आगे बढ़ रही है।
2027 से पहले बढ़ी सियासी हलचल
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पश्चिमी यूपी का महत्व काफी बढ़ गया है। इस क्षेत्र में जाट वोट बैंक पर RLD की पकड़ मानी जाती है, जबकि सपा गैर-यादव पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समूहों को जोड़कर PDA समीकरण मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में सपा और RLD के बीच बढ़ती बयानबाजी आने वाले चुनावों के लिए अहम मानी जा रही है। दोनों दलों के बीच दूरी बढ़ती है तो इसका असर पश्चिमी यूपी की कई विधानसभा सीटों पर देखने को मिल सकता है।
असली वजह क्या है?
फिलहाल सपा की आधिकारिक वजह मौसम ही है और रैली की नई तारीख भी अभी तय नहीं हुई है। वहीं RLD इसे राजनीतिक विरोध का परिणाम बता रहा है। ऐसे में यह साफ कहना मुश्किल है कि रैली सिर्फ मौसम के कारण स्थगित हुई या राजनीतिक माहौल का भी असर रहा। इस बीच अखिलेश यादव का 2 सितंबर को सहारनपुर दौरा प्रस्तावित है। वह सपा महासचिव चौधरी रुद्रसैन के आवास पर जाएंगे। रैली स्थगित होने के बाद यह दौरा भी राजनीतिक नजरिए से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सपा और RLD के बीच बढ़ती तल्खी किस दिशा में जाती है और 2027 के चुनाव से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति किस नए समीकरण में बदलती है।
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