SCO समिट 2025: पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात, भारत-चीन संबंधों पर होगी अहम चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 31 अगस्त को चीन के तियानजिन शहर में आयोजित होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट के दौरान मुलाकात करेंगे। यह मुलाकात खास इसलिए भी है क्योंकि दोनों नेता एक साल के भीतर दूसरी बार आमने-सामने होंगे। आपको बता दें पिछली बार अक्टूबर 2024 में उनकी बातचीत हुई थी, जिसमें भारत और चीन ने सीमा विवाद को सुलझाने के लिए संवाद जारी रखने पर सहमति जताई थी। इस बार भी दोनों नेताओं के बीच सीमा विवाद और आपसी सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

 SCO समिट में 20 से अधिक देशों के नेता

 SCO समिट 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चलेगा। इस बैठक में 20 से ज्यादा देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रतिनिधि शामिल होंगे। पीएम मोदी केवल चीन के राष्ट्रपति से मिलेंगे, बल्कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और मध्य एशियाई देशों के नेताओं से भी बातचीत करेंगे। इस मुलाकात के जरिए भारत का मकसद एशियाई देशों के साथ अपने रिश्तों को और मजबूत करना है।

 जापान के साथ रिश्तों पर भी रहेगा फोकस

 प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा जापान दौरे के तुरंत बाद हो रही है। वे 29 और 30 अगस्त को जापान में रहेंगे, जहां वे टोक्यो में भारत-जापान के 15वें वार्षिक सम्मेलन में शामिल होंगे। यह सम्मेलन जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के कार्यकाल में पहली बार हो रहा है। भारत के राजदूत सिबी जॉर्ज ने कहा कि यह यात्रा भारत-जापान संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। दोनों देशों के बीच बीते एक दशक में व्यापार, तकनीक, सुरक्षा और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

 क्वाड पर भी होगी चर्चा

 भारतीय राजदूत सिबी जॉर्ज ने टोक्यो में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे में क्वाड (QUAD) पर भी बातचीत होगी। क्वाड में भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। इसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए एक अहम मंच माना जाता है। जॉर्ज ने कहा कि जब क्वाड के दो बड़े सदस्य देशभारत और जापानएक साथ बैठेंगे तो निश्चित तौर पर वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति पर भी चर्चा होगी।

 भारत-चीन संबंधों पर नजर

 भारत और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद के कारण तनाव की स्थिति बनी रही है। हालांकि, अक्टूबर 2024 में दोनों देशों के बीच बातचीत के जरिए हालात को सामान्य करने की कोशिश की गई थी। इस बार SCO समिट में मोदी और जिनपिंग की मुलाकात को रिश्तों को सुधारने की दिशा में एक और बड़ा कदम माना जा रहा है।

 रणनीतिक महत्व की यात्रा

 प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल भारत-चीन ही नहीं, बल्कि भारत-जापान और भारत-रूस संबंधों के लिहाज से भी बेहद अहम है। जहां जापान के साथ संबंध तकनीक और निवेश पर केंद्रित हैं, वहीं चीन और रूस के साथ बातचीत का मकसद सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन बनाना है।

 कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी का यह एशिया दौरा भारत की विदेश नीति के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। एक तरफ जापान में भारत के आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को नई गति मिलेगी, वहीं चीन में SCO समिट के जरिए एशिया की राजनीति में भारत की भूमिका और मजबूत होगी।

 

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